नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के आधार पर सरकारों को नियमों के अनुसार कार्रवाई के निर्देश।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के आधार पर सरकारों को नियमों के अनुसार कार्रवाई के निर्देश।

भारतीय रेलवे बोर्ड एवं सुप्रीम कोर्ट निर्णय।

10 वर्ष से अधिक सेवा करने वाले दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण पर विचार।

लाइसेंस पोर्टर (Licensed Porter) को रेलवे ग्रुप-D/Level-1 में शामिल करने या विचार करने की जो नीति/प्रस्ताव विभिन्न जोनों और Railway Board के निर्देशों के आधार पर चलता रहा है, उसकी सामान्य पात्रता शर्तें इस प्रकार रही हैं।
1. सेवा अवधि (Service Requirement)
आम तौर पर कम से कम 10 वर्ष की नियमित लाइसेंस पोर्टर सेवा
सेवा लगातार और मान्य लाइसेंस के तहत होनी चाहिए
बीच में लंबा ब्रेक/अनियमित लाइसेंस होने पर पात्रता प्रभावित हो सकती है
🔹 2. वैध लाइसेंस
रेलवे स्टेशन पर कार्य करने वाला valid Licensed Porter Card
लाइसेंस रेलवे द्वारा जारी और समय-समय पर नवीनीकृत होना चाहिए
3. आयु सीमा
सामान्यतः Group-D भर्ती नियम लागू होते हैं:
न्यूनतम: 18 वर्ष
अधिकतम: 33 वर्ष (आरक्षण अनुसार छूट लागू)
कुछ मामलों में “in-service absorption” में आयु शिथिलता दी जाती है (zone पर निर्भर)
🔹 4. शैक्षणिक योग्यता
न्यूनतम: 10वीं पास (Matriculation)
कुछ जोनों में ITI/अन्य तकनीकी योग्यता भी स्वीकार की जाती है (यदि लागू हो)।
5. मेडिकल फिटनेस
रेलवे Level-1 पद के अनुसार Medical Standard (A-2 / B-1 या C-1, पद के अनुसार)
भारी सामान उठाने/स्टेशन कार्य के लिए फिट होना जरूरी
🔹 6. अनुशासन/रिकॉर्ड
किसी गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई या रेलवे नियम उल्लंघन का रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए
स्टेशन सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य
🔹 7. चयन प्रक्रिया (जहाँ लागू हो)
कुछ मामलों में:
लिखित परीक्षा (RRC Level-1)
या केवल screening + seniority + medical
यह पूरी तरह Zonal Railway policy पर निर्भर करता है
🔹 8. अतिरिक्त (Controversial / case-based)
2019 के आसपास कुछ प्रस्तावों में:
“Long-serving licensed porters को internal quota में प्राथमिकता”
लेकिन यह uniform nationwide rule नहीं था।
महत्वपूर्ण बात
कोई भी single all-India fixed “50% quota” पात्रता नियम नहीं है
पात्रता अक्सर:
Railway Board guidelines +
Zonal Railway circular +
Court directions
पर आधारित रहती है।
2019 में भारतीय रेलवे बोर्ड ने एक नीति के तहत लाइसेंस पोर्टरों (Licensed Porters) को ग्रुप-D/लेवल-1 पदों में अवसर देने का प्रावधान किया था। इस योजना में कहा गया था कि:

ग्रुप-D (Level-1) की कुछ रिक्तियों में लाइसेंस पोर्टरों को मौका दिया जाएगा।
पात्रता के लिए सामान्यतः कम से कम 10 वर्ष की सेवा आवश्यक मानी गई थी।
कई जोनों में 50% तक रिक्तियाँ ऐसे अनुभवी लाइसेंस पोर्टरों के लिए निर्धारित करने की बात लागू की गई थी।
चयन रेलवे भर्ती प्रक्रिया/स्क्रीनिंग के अनुसार होना था।

2019 की रेलवे लेवल-1 भर्ती (RRC Group-D) अधिसूचना उसी अवधि में जारी हुई थी।

नई दिल्ली। लंबे समय से सरकारी विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि 10 वर्ष या उससे अधिक समय से लगातार सेवा दे रहे कर्मचारियों के मामलों पर सरकार मानवीय और न्यायसंगत दृष्टिकोण से विचार कर सकती है।

हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया है कि सभी दैनिक मजदूरों को स्वतः स्थायी कर्मचारी या ग्रुप-D का दर्जा देना अनिवार्य नहीं है। नियमितीकरण संबंधित विभागीय नियमों, स्वीकृत रिक्त पदों तथा वैध नियुक्ति प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता का अधिकार तथा अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार को ध्यान में रखते हुए अदालतों ने कई मामलों में कर्मचारियों को राहत प्रदान की है। वहीं “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत को भी न्यायपालिका ने महत्वपूर्ण माना है।

सूत्रों के अनुसार कई राज्यों में लंबे समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों तक सेवा लेने के बाद कर्मचारियों को अस्थायी स्थिति में रखना उचित नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम Court के आदेशों की वास्तविक व्याख्या समझना जरूरी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर कई बार भ्रामक दावे वायरल हो जाते हैं कि सभी दैनिक मजदूरों को तत्काल स्थायी नौकरी देने का आदेश जारी हो चुका है। जबकि अदालत ने प्रत्येक मामले में नियमों और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय देने की बात कही है।

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