बर्लिन: जर्मनी के राष्ट्रपति स्टाइनमायर का कहना था कि हमले के लिए दिया गया “आत्मरक्षा” का कारण विश्वसनीय नहीं है।
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| जर्मनी के राष्ट्रपति का कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला जो किया है वह अंतरराष्ट्रीय कानून का उलंघन है। |
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार युद्ध (या सैन्य कार्रवाई) पूरी तरह “मना” नहीं है, लेकिन इसे बहुत कड़े नियमों में रखा गया है। खासकर युनाइटेड नेशन्स चार्टड के तहत।(1) कब युद्ध “सही” (कानूनी) माना जाता है ? आत्मरक्षा (Self-defense) अगर किसी देश पर हमला होता है, तो वह जवाबी हमला कर सकता है। यह अधिकार युनाइटेड नेशन्स के आर्टिकल्स 51 में दिया गया है।
उदाहरण:-अगर Iran पर पहले हमला हो और वह जवाब दे, तो यह वैध माना जा सकता है।
(2) UN Security Council की अनुमति:- अगर United Nations Security Council किसी देश के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति देता है,तब सैन्य कार्रवाई “वैध” मानी जाती है
उदाहरण:- शांति बनाए रखने या बड़े खतरे को रोकने के लिए संयुक्त कार्रवाई।
कब युद्ध “गलत” (गैर-कानूनी) माना जाता है?
1. बिना कारण हमला (Aggression):-अगर कोई देश बिना उकसावे के दूसरे देश पर हमला करता है,इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना जाता है।
उदाहरण: अगर Israel या United States बिना स्पष्ट खतरे के Iran पर हमला करें।
2.“Pre-emptive strike” का विवाद:- कभी-कभी देश कहते हैं: “हमने पहले हमला इसलिए किया क्योंकि खतरा आने वाला था” लेकिन: अगर खतरा तुरंत और स्पष्ट नहीं है,तो यह बहाना स्वीकार नहीं किया जाता है।
3.जरूरत से ज्यादा या गलत तरीका (War crimes) भले ही युद्ध वैध हो, फिर भी: नागरिकों पर हमला ❌अस्पताल/स्कूल को निशाना बनाना ❌ केमिकल हथियार ❌ये सब अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।
मुख्य कानून बिंदु:-संप्रभुता (Sovereignty): बिना वैध कारण किसी देश पर हमला करना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन माना जाता है। आत्मरक्षा (Self-defense): हमला तभी वैध माना जा सकता है जब वह आत्मरक्षा में हो (UN Charter के Article 51 के तहत)।
UN की अनुमति: अगर United Nations Security Council से मंजूरी हो, तो सैन्य कार्रवाई वैध हो सकती है।
बयान का मतलब:-अगर जर्मनी के राष्ट्रपति ने ऐसा कहा है, तो उसका अर्थ यह होता है कि वे बिना स्पष्ट आत्मरक्षा या UN मंजूरी के हमले को गलत मानते हैं। और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन जरूरी समझते हैं।
ध्यान देने वाली बात:-ऐसे मामलों में अलग-अलग देशों की व्याख्या अलग होती है। कुछ देश कहते हैं कि हमला “आत्मरक्षा” में था। जबकि अन्य देश इसे “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताते हैं।
ताज़ा खबर (जर्मनी के राष्ट्रपति का बयान):-जर्मनी के राष्ट्रपति Frank-Walter Steinmeier ने 24 मार्च 2026 को एक भाषण में कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” है। उन्होंने यह भी कहा यह युद्ध “अनावश्यक और टाला जा सकता था” और इसे “राजनीतिक रूप से बड़ी गलती (disastrous mistake)” बताया। यह बयान किस संदर्भ में दिया गया? यह बयान जर्मनी के विदेश मंत्रालय (Foreign Ministry) के एक कार्यक्रम में दिया गया।
उस समय: United States और Israel ने Iran पर फरवरी 2026 से सैन्य हमले शुरू किए थे।
इस युद्ध में:-एयरस्ट्राइक, मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है,पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है।जर्मनी का असल मैसेज क्या है? स्टाइनमायर का कहना था कि हमले के लिए दिया गया “आत्मरक्षा” का कारण विश्वसनीय नहीं है। इसलिए यह कार्रवाई UN चार्टर के नियमों के खिलाफ हो सकती है। यूरोप के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून बहुत जरूरी है। इसका महत्व क्यों है? जर्मनी आमतौर पर अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है।
लेकिन इस बार: उन्होंने खुलकर आलोचना की जिससे अमेरिका–यूरोप संबंधों में तनाव दिख रहा है।
आसान शब्दों में समझें:- जर्मनी कह रहा है “अगर बिना साफ आत्मरक्षा या UN की मंजूरी के हमला किया गया है, तो यह नियमों के खिलाफ है।

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