कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने सरकार बनाने को उत्साहित।
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| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजयोग समाप्त ममता समर्थक द्वारा बीजेपी पर आरोप प्रत्यारोप। |
पश्चिम बंगाल में सरकार बनने पर लोगों को खुशी मिली इतनी ही खुशी युवा को बेरोजगारी से मिलेगी।ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सरकार धाराशाई हो गई। 191बीजेपी, 97 टी एम सी,कांग्रेस 01,लेफ्ट 01 निर्दलीय 03, पश्चिम बंगाल की सत्ता पर बीजेपी काबिज हो गए।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कैरियर 4/5/2026 को बीजेपी ने बेईमानी से धाराशाई कर दिया। |
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हारने पर महिला खुशियां मनाई। |
ममता बनर्जी भारत की प्रमुख राजनीतिज्ञों में से एक हैं और पश्चिम बंगाल की वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। उनका राजनीतिक करियर काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है।शुरुआती जीवन और शिक्षा:-
ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में हुआ। उन्होंने कोलकाता युनिवर्सिटी से इतिहास, इस्लामिक इतिहास, शिक्षा और कानून की पढ़ाई की।
राजनीतिक करियर की शुरुआत:- उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत इंडियन नेशनल कांग्रेस (कांग्रेस) से की। 1970 के दशक में वह छात्र राजनीति में सक्रिय हुईं। 1984 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव जीता और सबसे युवा सांसदों में शामिल हुईं।
तृणमूल कांग्रेस की स्थापना:- 1997 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की स्थापना की। यह पार्टी आगे चलकर पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक ताकत बन गई। केंद्रीय मंत्री के रूप में भूमिका ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पद संभाले:-
रेल मंत्री (दो बार)
कोयला और खनन मंत्री
मानव संसाधन विकास, युवा मामले और खेल मंत्रालय में भी कार्य किया।
मुख्यमंत्री बनने का सफर:- 2011 में ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्स) के 34 साल पुराने शासन को समाप्त किया। इसके बाद वह पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। 2016 और 2021 में भी उन्होंने विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी।
प्रमुख विशेषताएं और पहचान:- “दीदी” के नाम से प्रसिद्ध जमीनी स्तर की राजनीति और जनसंपर्क के लिए जानी जाती हैं।
किसान और आम लोगों के मुद्दों पर मुखर:- ममता बनर्जी का करियर संघर्ष, दृढ़ता और राजनीतिक कौशल का उदाहरण है। उन्होंने एक साधारण कार्यकर्ता से देश की प्रभावशाली मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय किया।
प्रमुख फैसले
1. सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन।
सिंगुर और नंदीग्राम के आंदोलनों में ममता बनर्जी की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने किसानों की जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन किया।
इसका सीधा असर टाटा मोटर्स के नैनो प्रोजेक्ट पर पड़ा, जिसे बाद में गुजरात शिफ्ट करना पड़ा। इससे उन्हें “किसानों की नेता” की छवि मिली।
2. कन्याश्री योजना:-
राज्य की लड़कियों की शिक्षा और बाल विवाह रोकने के लिए “कन्याश्री” योजना शुरू की। इस योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली।
3. सबुज साथी और स्वास्थ्य योजनाएँ:-
छात्रों को साइकिल देने के लिए “सबुज साथी” योजना
“स्वास्थ्य साथी” के जरिए गरीबों को स्वास्थ्य बीमा
4. उद्योग और निवेश:-
उन्होंने राज्य में निवेश लाने के लिए कई पहल की, लेकिन उद्योगीकरण की गति को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ मिलीं।
प्रमुख विवाद (Controversies)
1. नारदा और शारदा चिटफंड घोटाला:-
Narada sting operation और Saradha chit fund scam में उनकी पार्टी के कई नेताओं के नाम सामने आए।
विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
2. कानून-व्यवस्था पर सवाल:-
राज्य में राजनीतिक हिंसा और चुनावी झड़पों को लेकर कई बार आलोचना हुई, खासकर चुनावों के दौरान।
3. केंद्र सरकार से टकराव:-
Narendra Modi की केंद्र सरकार के साथ उनका कई मुद्दों पर टकराव रहा।
इसमें संघीय ढांचे, एजेंसियों के इस्तेमाल और नीतियों को लेकर मतभेद शामिल हैं।
4. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे:-
कुछ मामलों में सरकार पर आलोचकों और कलाकारों पर कार्रवाई के आरोप लगे। ममता बनर्जी का कार्यकाल उपलब्धियों और विवादों दोनों का मिश्रण रहा है। जहां एक तरफ उन्होंने सामाजिक योजनाओं और किसान मुद्दों पर अपनी मजबूत पहचान बनाई, वहीं दूसरी तरफ उन्हें भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक टकराव जैसे मुद्दों पर आलोचना भी झेलनी पड़ी।
1. नंदीग्राम आंदोलन (2007)
नंदीग्राम में 2007 में यह आंदोलन शुरू हुआ।
क्या हुआ था:-
उस समय राज्य में Communist Party of India (Marxist) (वाम मोर्चा) की सरकार थी। सरकार इंडोनेशियाई कंपनी के साथ मिलकर एक केमिकल हब (SEZ) बनाना चाहती थी।
इसके लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की जानी थी।
आंदोलन और हिंसा:-
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। मार्च 2007 में पुलिस फायरिंग में कई लोगों की मौत हुई, जिससे मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया।
ममता बनर्जी की भूमिका:-
ममता बनर्जी ने इस आंदोलन का जोरदार समर्थन किया। इससे उनकी छवि एक जमीनी और किसान समर्थक नेता के रूप में मजबूत हुई। यही आंदोलन 2011 में सत्ता परिवर्तन की बड़ी वजहों में से एक बना।
2. शारदा चिटफंड घोटाला (2013)
शारदा चिटफंड घोटाला भारत के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक था, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों में फैला हुआ था।
क्या था यह घोटाला:-
यह घोटाला शारदा ग्रुप नाम की कंपनी द्वारा चलाया गया था। कंपनी ने आम लोगों को लालच दिया कि वे पैसा निवेश करें और बदले में उन्हें बहुत ज्यादा रिटर्न मिलेगा। यह एक तरह की पोंजी स्कीम थी जहाँ नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था।शारदा ग्रुप ने “चिटफंड” और निवेश योजनाओं के नाम पर लाखों लोगों से पैसा जमा किया। बाद में कंपनी ढह गई और निवेशकों का पैसा डूब गया।
कैसे हुआ खुलासा?
साल 2013 में अचानक कंपनी का पैसा खत्म हो गया और वह निवेशकों को भुगतान करने में असफल रही। इसके बाद लाखों लोग अपनी जमा पूंजी खो बैठे,कई एजेंट और निवेशक आर्थिक संकट में आ गए,कुछ मामलों में आत्महत्या की खबरें भी आईं
प्रमुख लोग और जांच:-
स मामले में कंपनी के मालिक सुदीप्तो सेन को गिरफ्तार किया गया,कई राजनेताओं पर भी आरोप लगे, जिनमें ममता बनर्जी की पार्टी के कुछ नेताओं के नाम सामने आए जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया।
प्रभाव:-
अनुमान है कि इस घोटाले में लगभग 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हुई,गरीब और मध्यम वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
सरकार की प्रतिक्रिया:-
पश्चिम बंगाल सरकार ने पीड़ितों के लिए राहत फंड बनाया और कुछ मुआवजा देने की कोशिश की।
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