बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को विजय प्राप्त करने के लिए अपराजिता मां की पूजा अर्चना की जाती है।

बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को विजय प्राप्त करने के लिए अपराजिता मां की पूजा अर्चना की जाती है।
चैत्र शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को मां अपराजिता अराधना करें।

बिहार के बरौनी क्षेत्र के सोकहारा सहित कई जगहों पर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराजिता माता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

अपराजिता पूजा का महत्व:-

अपराजिता पूजा अर्चना का महत्व 

अपराजिता माता देवी दुर्गा का ही एक स्वरूप मानी जाती हैं "अपराजिता” का अर्थ है"जिसे कोई पराजित न कर सके। इस दिन पूजा करने से जीवन में विजय और सफलता प्राप्त होती है।शत्रुओं और बाधाओं से रक्षा मिलती है।आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
बरौनी सोकहारा काली स्थान।

मां काली का उग्र रूप धारण 

पूजा विधि (संक्षेप में):-प्रातः स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें,घर या मंदिर में अपराजिता माता की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें,फूल, अक्षत, रोली, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। विशेष रूप से नीले या सफेद अपराजिता फूल चढ़ाए जाते हैं। “ॐ अपराजितायै नमः” मंत्र का जप करें।

स्थानीय परंपरा:- बेगूसराय और आसपास के गांवों में इस दिन महिलाएं और श्रद्धालु विशेष व्रत रखकर माता से परिवार की सुख-शांति और विजय की कामना करते हैं। कुछ स्थानों पर सामूहिक पूजा और भजन-कीर्तन भी आयोजित होते हैं।

अपराजिता माता की पूजा की पूरी विधि, कथा और मंत्र विस्तार पूर्वक जानकारी:-

अपराजिता माता पूजा की विस्तृत विधि प्रातः तैयारी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। घर के पूजा स्थान को साफ करके पवित्र करें,प्रतिमा/चित्र स्थापना देवी दुर्गा के अपराजिता स्वरूप का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें,लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।

पूजन सामग्री:-रोली, अक्षत, फूल (विशेषकर अपराजिता फूल) धूप, दीप, नैवेद्य (फल/मिठाई) गंगाजल, नारियल।

मंत्र जप:- कम से कम 108 बार मंत्र का जप करें।

आरती और प्रार्थना:-
अंत में माता की आरती करें और विजय की कामना करें।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हो रहा था, तब देवी दुर्गा ने अपराजिता रूप धारण कर असुरों का संहार किया। इस रूप में देवी कभी पराजित नहीं होतीं, इसलिए उन्हें “अपराजिता” कहा गया। कहा जाता है कि जो भी भक्त इस दिन श्रद्धा से उनकी पूजा करता है, उसे जीवन के हर संघर्ष में विजय प्राप्त होती है और कोई भी शत्रु उसका अहित नहीं कर पाता।


4. विशेष बातें:- इस दिन सफेद या नीले अपराजिता फूल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है। व्रत रखने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। मन में सच्ची श्रद्धा और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है।


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