दुबई: ईरान के ड्रोन इतने सस्ते कैसे बन जाते हैं और वे कितने खतरनाक हो सकते हैं।
ईरान ने यह रणनीति क्यों अपनाई,विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके पीछे कुछ कारण हैं: आर्थिक दबाव – सस्ते ड्रोन से महँगे इंटरसेप्टर खर्च करवाना।
सैचुरेशन अटैक – एक साथ बहुत सारे ड्रोन भेजना ताकि रक्षा प्रणाली पर दबाव पड़े। तकनीकी सरलता ड्रोन बनाना और लॉन्च करना अपेक्षाकृत आसान। बचाव के नए तरीके इस समस्या से निपटने के लिए अमेरिका और इज़राइल जैसे देश नए उपायों पर काम कर रहे हैं, जैसे:
लेज़र आधारित रक्षा – जैसे Iron Beam, जिसकी प्रति शॉट लागत बहुत कम हो सकती है। इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग
सस्ते एंटी-ड्रोन सिस्टम इसलिए आपका कथन पूरी तरह गलत नहीं है—कई मामलों में सचमुच हज़ारों डॉलर के ड्रोन को गिराने के लिए लाखों डॉलर की मिसाइलें खर्च करनी पड़ती हैं, और यही आधुनिक युद्ध की बड़ी रणनीतिक चुनौती बन गई है। अगर चाहें तो मैं यह भी समझा सकता हूँ कि ईरान के ड्रोन इतने सस्ते कैसे बन जाते हैं और वे कितने खतरनाक हो सकते हैं।
ईरान के कई हमलावर ड्रोन अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं, लेकिन फिर भी प्रभावी साबित होते हैं। इसका कारण उनकी सरल डिजाइन, सस्ते पार्ट्स और अलग रणनीति है। उदाहरण के लिए Shahed-136 जैसे “कामीकाज़े ड्रोन” को खास तौर पर कम लागत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए बनाया गया है।
सस्ते क्यों होते हैं सरल डिजाइन इन ड्रोन में जेट इंजन नहीं होता, बल्कि छोटा पिस्टन इंजन होता है। संरचना साधारण फाइबरग्लास या हल्की सामग्री से बनती है। कम इलेक्ट्रॉनिक्स कई ड्रोन में महंगे सेंसर या कैमरे नहीं होते।
वे अक्सर GPS या पहले से प्रोग्राम किए गए रास्ते से लक्ष्य तक जाते हैं। बड़े पैमाने पर उत्पादन ईरान इन ड्रोन को बड़ी संख्या में बनाता है, जिससे प्रति यूनिट लागत कम हो जाती है। सस्ते या कमर्शियल पार्ट्स कुछ हिस्से नागरिक बाजार में मिलने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स से भी बनाए जाते हैं।
कितने खतरनाक हो सकते हैं,सस्ते होने के बावजूद ये ड्रोन कई कारणों से खतरनाक माने जाते हैं “कामीकाज़े” हमला जैसे Shahed-136 सीधे लक्ष्य से टकराकर विस्फोट करता है। झुंड (Swarm) हमला एक साथ दर्जनों ड्रोन भेजे जा सकते हैं, जिससे रक्षा प्रणाली पर दबाव पड़ता है।
लंबी दूरी कुछ ड्रोन 1000–2000 किमी तक उड़ सकते हैं।
रडार से पकड़ना कठिन छोटे आकार और धीमी गति के कारण इन्हें कभी-कभी रडार पर पहचानना मुश्किल होता है।


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