नई दिल्ली:New Delhi/NEET मेडिकल परीक्षा पर भरोसा टूटा, फिर भी NTA क्यों? सेना को जिम्मेदारी देने की मांग तेज।
परीक्षार्थी ने कहा परीक्षा परिणाम घोषित तक सेना को जिम्मेदारी सौंपी जाए। NTA की पुर्ण जिम्मेदारी देना पुनरावृत्ति करने के बराबर होगा।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर लगातार विवाद सामने आने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा National Testing Agency (NTA) पर कमजोर पड़ता जा रहा है।

परीक्षार्थी ने कहा परीक्षा परिणाम घोषित तक सेना को जिम्मेदारी सौंपी जाए। NTA की पुर्ण जिम्मेदारी देना पुनरावृत्ति करने के बराबर होगा।
2024 से शुरू हुआ पेपर लीक, रिजल्ट गड़बड़ी और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल अब 2026 तक जारी हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है।
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NTA “अपनी गलतियों से सबक नहीं सीख रहा।” कोर्ट ने NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार और NTA को नोटिस जारी किया।
इससे पहले 2024 में भी सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि NEET परीक्षा के संचालन में “गंभीर चिंताएं” सामने आई हैं। हालांकि अदालत ने पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराने से इनकार किया था।
2024 NEET विवाद में पेपर लीक, असामान्य टॉप स्कोर, ग्रेस मार्क्स और एक ही सेंटर से बड़ी संख्या में टॉपर्स आने पर देशभर में विरोध हुआ था।
सोशल मीडिया और छात्र समुदायों में लगातार यह मांग उठ रही है कि परीक्षा व्यवस्था को किसी अधिक अनुशासित और पारदर्शी संस्था के हवाले किया जाए।
कई छात्रों ने कहा कि अब उन्हें NTA की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं रहा।
सख्तअनुशासन,सुरक्षित,लॉजिस्टिक्स,गोपनीयता बनाए रखने की क्षमता,बड़े स्तर पर संचालन का अनुभव।
मौजूद है। इसलिए मेडिकल और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं का संचालन सेना या सेना की निगरानी वाली स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग बढ़ रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि सेना का मुख्य कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा है, इसलिए परीक्षा संचालन के लिए अलग स्वायत्त और जवाबदेह परीक्षा प्राधिकरण बनाना अधिक व्यावहारिक समाधान हो सकता है।
सरकार सुधार की तैयारी में:
केंद्र सरकार अब NTA में बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार NEET और JEE जैसी परीक्षाओं के लिए नई व्यवस्था और संयुक्त परीक्षा मॉडल पर चर्चा चल रही है।
NEET जैसी परीक्षा करोड़ों युवाओं के भविष्य का फैसला करती है। लगातार विवादों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को गहरा नुकसान पहुंचाया है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें