नई दिल्ली:रेलवे में निजीकरण से जापान, ब्रिटिश रेलवे,डॉयचे बान,स्वीडन, आस्ट्रेलिया रेल ट्रैक कारपोरेशन, फायदा हुआ।
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| जापान के ट्रेनों में चढ़ने हवाई यात्रा का अनुभव होता है। |
नीचे प्रमुख उदाहरणों के साथ समझते हैं। जहाँ निजीकरण/आंशिक निजीकरण से फायदे हुए।
Japan Railways Group (जापान) 1987 में सरकारी रेलवे (JNR) को निजी कंपनियों में बाँटा गया।
लोहे की एंगिल से बना रेलवे पुल
फायदे: समय पर ट्रेनें (world-class punctuality)
घाटे में चल रही व्यवस्था मुनाफे में आई,बेहतर ग्राहक सेवा और तकनीकी सुधार।
British Rail → निजी कंपनियाँ (यूके) 1990ई० में निजीकरण।
जापानी रेलवे को निजीकरण से फायदा ही फायदा हुआ।
फायदे: यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि नई ट्रेनों और सेवाओं में निवेश।
लेकिन: किराए बढ़े और सिस्टम जटिल हुआ (mixed results)
Deutsche Bahn (जर्मनी) पूरी तरह निजी नहीं, पर कॉर्पोरेट मॉडल (सरकारी + बिज़नेस स्टाइल)।
फायदे: बेहतर मैनेजमेंट अंतरराष्ट्रीय विस्तार प्रतिस्पर्धा के कारण सुधार।
SJ AB (स्वीडन)1980ई०–90ई०)में आंशिक निजीकरण।
फायदे: प्रतिस्पर्धा बढ़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लागत में कमी जहाँ परिणाम मिले-जुले रहे Amtrak (अमेरिका) मालगाड़ी (freight) निजी कंपनियों के पास है।
फायदे: दुनिया का सबसे कुशल freight network
लेकिन: यात्री सेवाएँ कमजोर (सरकारी निर्भरता)।
Australian Rail Track Corporation (ऑस्ट्रेलिया)
मिश्रित मॉडल (सरकारी + निजी)
फायदे: माल ढुलाई में सुधार।
समस्या: अलग-अलग राज्यों में असमान गुणवत्ता जहाँ निजीकरण से समस्याएँ बढ़ीं फेरोकारिलेस अर्जेंटीनोस (अर्जेंटीना) 1990 ई० में निजीकरण।
नुकसान: सुरक्षा में गिरावट कई रूट बंद बाद में सरकार को फिर नियंत्रण लेना पड़ा। रूशियन रेलवे (रूस) सीमित निजीकरण।
समस्या: प्रतिस्पर्धा कम अपेक्षित सुधार नहीं।
निष्कर्ष:सफलता की शर्तें:मजबूत नियम (regulation) पारदर्शिता प्रतिस्पर्धा।
सबसे सफल मॉडल: पूरा निजीकरण नहीं, बल्कि हाइब्रिड मॉडल (सरकार + निजी भागीदारी) जापान को सबसे सफल उदाहरण माना जाता है, जबकि यूके और स्वीडन “मिश्रित सफलता” वाले केस हैं।

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