बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है।

बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है।

सोकहारा वाटिका चौक 

चैत्र शुक्ल पक्ष नवरात्रि महाअष्टमी पूजा महोत्सव एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है, जो विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह पूजा नवरात्रि के आठवें दिन, यानी महाअष्टमी के दिन की जाती है, जो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में आता है। नवरात्रि का पर्व खासतौर पर शारदीय नवरात्रि (अक्टूबर) और चैत्र माह के नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) के दौरान मनाया जाता है।

महाअष्टमी विशेष रूप से दुर्गा माँ की पूजा का दिन होता है, जिसमें विशेष रूप से उनकी शक्तियों का वंदन किया जाता है। यह दिन देवी दुर्गा के शेर पर सवार होने और असुरों का वध करने की याद दिलाता है। इस दिन विशेष पूजा, व्रत, और साधना की जाती है। इसे "महाकाली" या "महासप्तमी" भी माना जाता है, क्योंकि इस दिन देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्रों का उच्चारण और पूजा विधियाँ होती हैं।
माँ की नौ रूपों में पूजा:- नवरात्रि के आठवें दिन देवी दुर्गा के आठ रूपों की पूजा होती है, जैसे महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती आदि।
हवन करना या आग में विशेष घी और तिल डालकर देवी को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
इस दिन विशेष रूप से "दुर्गा सप्तशती" के पाठ का महत्व है, साथ ही "मंत्र: "ॐ दुं दुर्गायै नमः" का जाप भी किया जाता है। यह मंत्र देवी दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है।
महाअष्टमी का दिन देवी के रौद्र रूप, जो असुरों का वध करती हैं, को मान्यता देता है। यह दिन विशेष रूप से शत्रु के नाश और बुराई से मुक्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 2026 के बारे में सही जानकारी इस प्रकार है ?

अष्टमी तिथि (Durga Ashtami 2026) तिथि प्रारंभ: 25 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 2:05 बजे तिथि समाप्त: 26 मार्च 2026 को लगभग 12:00 बजे (दोपहर) उदया तिथि (सूर्योदय के अनुसार) के आधार पर अष्टमी व्रत और पूजन – 26 मार्च 2026 (गुरुवार) को किया जाएगा।

शुभ मुहूर्त (पूजा समय) अष्टमी पूजा के लिए श्रेष्ठ समय:सुबह से दोपहर तक (उदयकाल से) — सबसे शुभ माना जाता है विशेष संधि पूजा मुहूर्त:-सुबह 11:24 बजे से 12:12 बजे तक
यह समय अष्टमी और नवमी के संधिकाल का होता है, जिसे बहुत ही पवित्र माना जाता है।
अष्टमी तिथि: 25 मार्च दोपहर → 26 मार्च दोपहर
पूजा/व्रत: 26 मार्च 2026 सबसे शुभ समय: सुबह से दोपहर + संधि मुहूर्त (11:24–12:12) चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि नवरात्रि अष्टमी पूजा !
चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी (नवरात्रि अष्टमी / दुर्गा अष्टमी) हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, जिसे मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है।

यह दिन उदय तिथि के अनुसार अष्टमी पूजा के लिए मान्य है।
अष्टमी पूजा का महत्व:- इस दिन मां दुर्गा के 8वें स्वरूप — महागौरी की पूजा होती है।मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से: पापों का नाश होता है।सुख-समृद्धि आती है।मन की इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
पूजा का शुभ समय,सबसे उत्तम समय:-सूर्योदय से लेकर दोपहर तक (विशेषकर मध्याह्न काल) विशेष संधि पूजा मुहूर्त:
लगभग 11:24 AM से 12:12 PM यह समय अष्टमी और नवमी के मिलन का पवित्र काल होता है।अष्टमी पूजा विधि (सरल तरीके से) सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर मां दुर्गा की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।गंगाजल से शुद्धि करें,फूल, रोली, चावल, धूप-दीप अर्पित करें। दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें,नैवेद्य (हलवा-पूरी, चना) अर्पित करें,आरती करें और प्रसाद बांटें कन्या पूजन (कंजक) 2 से 9 वर्ष की कन्याओं को देवी का रूप मानकर पूजते हैं। उन्हें हलवा, पूरी, चना खिलाएं चुनरी, दक्षिणा दें
इसे करने से विशेष पुण्य मिलता है।
खास बात:-बहुत से लोग अष्टमी या नवमी में से किसी एक दिन कन्या पूजन करते हैं। अष्टमी का दिन अधिक लोकप्रिय और शुभ माना जाता है।


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