रेलवे कुलियों की ग्रुप-डी में समायोजन की मांग: पत्रों के बाद भी नहीं निकला समाधान, सांसदों की पहल पर उठे सवाल।

रेलवे कुलियों की ग्रुप-डी में समायोजन की मांग: पत्रों के बाद भी नहीं निकला समाधान, सांसदों की पहल पर उठे सवाल।

दो फरवरी को बजट पेश होगा लेकिन जबाब क्या मिलेगा।

पहले से रेलवे कुली  को जानकारी प्राप्त कर 

नई  है। दिल्ली। देशभर के रेलवे स्टेशनों पर वर्षों से यात्रियों का सामान उठाने का काम कर रहे लाइसेंसधारी रेलवे कुलियों को रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर समायोजित करने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के रेलवे कुलियों ने अपने-अपने स्थानीय सांसदों के माध्यम से प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को पत्र भेजकर अपनी मांग रखने की कोशिश की है। हालांकि, कुलियों का कहना है कि अब तक उन्हें इस पहल का कोई ठोस परिणाम नहीं मिला है।
कुलियों के अनुसार, उन्होंने सांसदों से आग्रह किया था कि उनकी मांग को संसद में प्रभावी ढंग से उठाया जाए और प्रधानमंत्री तथा रेल मंत्री के समक्ष समायोजन का मुद्दा मजबूती से रखा जाए। उनका दावा है कि कई सांसदों ने पत्राचार तो किया, लेकिन मामला संसद के स्तर पर प्रभावी तरीके से आगे नहीं बढ़ सका।
कुलियों का कहना है कि वे लंबे समय से रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेवा करते आ रहे हैं और कठिन परिस्थितियों में अपना रोजगार चला रहे हैं। उनका तर्क है कि उनकी सेवाओं और लंबे अनुभव को देखते हुए रेलवे में ग्रुप-डी के पदों पर समायोजन के लिए सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
अब देशभर के कुलियों की निगाहें प्रधानमंत्री, रेल मंत्रालय और संसद पर टिकी हैं। कुलियों का कहना है कि केवल पत्राचार से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि सांसदों को इस मुद्दे को संसद में उठाकर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगना चाहिए।
कुलियों ने मांग की है कि केंद्र सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांग पर ठोस निर्णय लेने की दिशा में कदम उठाए।

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