रेलवे कुलियों की ग्रुप-डी में समायोजन की मांग: पत्रों के बाद भी नहीं निकला समाधान, सांसदों की पहल पर उठे सवाल।

रेलवे कुलियों की ग्रुप-डी में समायोजन की मांग: पत्रों के बाद भी नहीं निकला समाधान, सांसदों की पहल पर उठे सवाल।

श्रीमती स्मिता उदय बाघ सांसद को जलगांव महाराष्ट्र के रेलवे कुली ने ग्रुप डी में समायोजित करने के लिए पत्र दिया।

नई दिल्ली। देशभर के रेलवे स्टेशनों पर वर्षों से यात्रियों का सामान उठाकर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले रेलवे कुलियों की ग्रुप-डी में समायोजन की मांग एक बार फिर चर्चा में है। कुलियों का कहना है कि उन्होंने अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों से प्रधानमंत्री और रेल मंत्री के नाम पत्र लिखवाकर अपनी मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।

कुलियों का कहना है कि सांसदों द्वारा पत्र भेजना पर्याप्त नहीं है। उनका मुद्दा संसद में उठाया जाना चाहिए और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि कई मामलों में सांसदों ने केवल पत्राचार तक सीमित पहल की, जिसके कारण उनकी मांग आगे नहीं बढ़ सकी।

 

कुलियों का बयान:-

रेलवे कुलियों का कहना है कि वे वर्षों से रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। उनका कहना है कि बदलती रेलवे व्यवस्था, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और यात्रियों के सामान ढोने के काम में आए बदलावों के कारण उनकी आजीविका पर असर पड़ा है। कुलियों का कहना है कि सरकार उनके लंबे अनुभव और सेवाओं को देखते हुए ग्रुप-डी में समायोजन की नीति पर गंभीरता से विचार करे।

सांसदों से 5 सवाल:-

क्या सांसदों ने कुलियों की मांग को संसद में प्रश्न या शून्यकाल के माध्यम से उठाया?
क्या प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को भेजे गए पत्रों पर प्राप्त जवाब की जानकारी कुलियों को दी गई?
क्या सांसदों ने रेल मंत्रालय से कुलियों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक कराने की मांग की?
क्या संबंधित संसदीय समितियों के सामने कुलियों की समस्या रखने का प्रयास किया गया?
क्या सांसद सरकार से ग्रुप-डी में समायोजन के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग करेंगे?

सरकार से 5 सवाल:-

क्या सरकार रेलवे कुलियों की लंबे समय से चली आ रही ग्रुप-डी में समायोजन की मांग पर विचार कर रही है?
क्या कुलियों के अनुभव और वर्षों की सेवा को किसी प्रस्तावित नीति में महत्व दिया जाएगा?
क्या रेलवे कुलियों के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठक की जाएगी?
क्या सरकार इस मांग पर संसद में या रेल मंत्रालय के स्तर पर स्पष्ट जवाब देगी?
यदि ग्रुप-डी में समायोजन संभव नहीं है, तो कुलियों के रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिए सरकार की वैकल्पिक नीति क्या है?

अब जवाब का इंतजार:-

कुलियों का कहना है कि वर्षों से पत्राचार और आश्वासनों के बावजूद उनकी मांग का समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अब उन्हें केवल पत्र नहीं, बल्कि संसद में मुद्दा उठाए जाने और सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय की आवश्यकता है। ऐसे में आने वाले समय में सांसदों और रेल मंत्रालय की पहल इस मुद्दे की दिशा तय कर सकती है।

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