सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंसधारी रेलवे पोर्टरों की स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने लाइसेंसधारी रेलवे पोर्टरों की स्थिति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। 

Supreme Court Justice

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे प्रशासन उनके काम, समय, दरों, वर्दी और अनुशासन को नियंत्रित करता है तथा उन्हें रेलवे की ओर से सुविधाएँ भी मिलती हैं। इस आधार पर उन्हें रेलवे की सेवा से जुड़े “workmen” माना गया।

22 अगस्त 2003 — All India Railway Parcel & Goods Porters Union v. Union of India

यह पार्सल पोर्टरों/कॉन्ट्रैक्ट पोर्टरों के नियमितीकरण से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला था। बाद के न्यायिक रिकॉर्ड में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सार इस प्रकार दर्ज है:

पहले यह जांच हो कि दावा करने वाले पोर्टर वास्तव में संबंधित रेलवे स्टेशनों पर काम करते थे।

पात्र पाए जाने पर रेलवे को उन्हें स्थायी रूप से absorb/regularise करना था।

नियमितीकरण उपलब्ध perennial (निरंतर) काम की मात्रा तक सीमित होना था।

नियमित रेलवे पार्सल पोर्टरों के समान न्यूनतम वेतनमान और सेवा लाभ मिलने थे।

अधिक लंबे समय तक काम कर चुके पोर्टरों को प्राथमिकता दी जानी थी।

महत्वपूर्ण अंतर: 1979 का मामला मुख्यतः licensed passenger porters की कानूनी स्थिति से जुड़ा था, जबकि 2003 का फैसला विशेष रूप से contract railway parcel porters के absorption/regularisation से संबंधित था। इसलिए हर रेलवे कुली पर 2003 का आदेश स्वतः लागू नहीं माना जा सकता।

1995 से 2008 तक सुप्रीम कोर्ट के रेलवे कुली/पोर्टर संबंधी सभी प्रमुख आदेश तारीख और केस नंबर सहित क्रमवार निकाल कर दे रहा हूं।

 1995–2008 : प्रमुख सुप्रीम कोर्ट आदेश/निर्णय।

क्रम संख्या (1) 09 मई 1995 W.P(C) No.507/1992 With W.P No.415/1992,82/1993&838/1992, National Federation of Railway Porters, Vendor & Bearers Vs Union of india.

रेलवे में ठेके के माध्यम से लंबे समय से काम कर रहे Parcel Porters के नियमितीकरण/स्थायी अवशोषण के लिए महत्वपूर्ण आदेश। कोर्ट ने जाँच रिपोर्ट के आधार पर पात्र पोर्टरों को उपलब्ध स्थायी/परिनियल काम के अनुपात में नियमित रूप से absorb करने के निर्देश दिए।

(2) 08 जुलाई 1996 W.P.(C) Nos. 568/1995 & 711/1995.National Federation of Railway Porters' Union matters.1995 के निर्णय के बाद फिर से Parcel Porters के नियमितीकरण/अवशोषण के संबंध में निर्देश दिए गए। बाद के 2003 के सुप्रीम कोर्ट निर्णय ने इन दोनों मामलों को स्पष्ट रूप से precedent के रूप में दर्ज किया है।

(3)19 सितम्बर 1997 W.P.(C) No. 90/1997.Railway Parcel Porters matter.सुप्रीम कोर्ट ने Assistant Labour Commissioner, Calcutta को जाँच करने का निर्देश दिया कि संबंधित पोर्टर लगातार काम कर रहे थे या नहीं, काम perennial nature का था या नहीं और Contract Labour (Regulation & Abolition) Act की धारा 10 की शर्तें पूरी होती थीं या नहीं।

(4) 01 अक्टूबर 1997

Civil Appeal No. 6953/1997, arising from SLP(C) No. 19434/1996.Rashtriya Chaturth Shreni Railway Majdoor Congress (INTUC) v. Union of India.

Agra Fort Railway Station के Parcel Porters का मामला। सुप्रीम कोर्ट ने CAT का आदेश रद्द कर Tribunal को निर्देश दिया कि वह 1995 के National Federation फैसले के सिद्धांतों के आधार पर मामले का merits पर निर्णय करे।





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