N. Mari बनाम Ministry of Railways का 7 मार्च 2025 का फैसला Central Administrative Tribunal (CAT), चेन्नई बेंच का फैसला है।

N. Mari बनाम Ministry of Railways का 7 मार्च 2025 का फैसला  Central Administrative Tribunal (CAT), चेन्नई बेंच का फैसला है।
बी जे पी सरकार से उम्मीद नहीं करें

भारतीय जनता पार्टी की सरकार से रेलवे कुली अपने बच्चों के भविष्य बेहतर बनाने के लिए उम्मीद नहीं करें।

फैसले में क्या हुआ?

मामला N. Mari @ Mariappan, जॉलेरपेट रेलवे स्टेशन के लाइसेंसधारी कुली-पोर्टर का था। उन्होंने रेलवे बोर्ड के RBE No. 50/2008, दिनांक 1 अप्रैल 2008 के आधार पर उन्हें Gangman (बाद में Trackman) के पद पर नियुक्त करने की मांग की थी। 

Indian Kanoon:- भारतीय कानून ?

रेलवे बोर्ड की 2008 की योजना के तहत उस समय कुछ शर्तें पूरी करने वाले लाइसेंसधारी कुलियों को एकमुश्त आधार पर Gangman पद पर नियुक्त करने का प्रावधान किया गया था। इनमें 26 फरवरी 2008 को वैध लाइसेंस, 18–50 वर्ष की आयु, मेडिकल फिटनेस और स्क्रीनिंग जैसी शर्तें थीं। नियुक्ति होने पर कुली का लाइसेंस और बैज छोड़ना था। 
N. Mari की नियुक्ति इसलिए रोक दी गई थी क्योंकि उनके पिता के नाम पुराने बैज नंबर 10 और उनके पास मौजूद बैज नंबर 13 को लेकर रेलवे रिकॉर्ड में विसंगति थी। CAT ने माना कि बैज नंबर 13 रेलवे अधिकारियों ने ही जारी किया था और इस विसंगति के लिए कुली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। 

Indian Kanoon:-
CAT का आदेश:-

CAT ने 6 सितंबर 2017 के रेलवे के आदेश को रद्द कर दिया और रेलवे को निर्देश दिया कि N. Mari के मामले पर RBE No. 50/2008 के तहत पुनर्विचार करके उन्हें Gangman के पद पर नियुक्त किया जाए और नियमानुसार संबंधित लाभ दिए जाएं। इसके लिए तीन महीने की समय-सीमा दी गई थी।
इसलिए इस मामले को “सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे कुलियों को स्थायी नौकरी देने का फैसला दिया” कहना सही नहीं होगा। सही तथ्य यह है कि 7 मार्च 2025 को CAT चेन्नई बेंच ने एक लाइसेंसधारी कुली के व्यक्तिगत मामले में रेलवे को नियुक्ति पर पुनर्विचार/नियुक्ति का आदेश दिया। 



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