लॉकडाउन के दौरान गरीबों और बेघर लोगों को भोजन संकट का सामना, राहत व्यवस्था पर उठे सवाल।

लॉकडाउन के दौरान गरीबों और बेघर लोगों को भोजन संकट का सामना, राहत व्यवस्था पर उठे सवाल।

लॉकडाउन में बच्चे बुढ़े कैसे छटपटा रहे हैं।

नई दिल्ली:

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान देश के कई हिस्सों में गरीब, दिहाड़ी मजदूर, बेघर लोगों और भिक्षावृत्ति पर निर्भर लोगों को भोजन और आजीविका से जुड़ी गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विभिन्न सामाजिक संगठनों और मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि अनेक जरूरतमंद लोगों तक समय पर भोजन और राहत नहीं पहुंच सकी, जिससे मानवीय संकट गहरा गया।

विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उस समय सरकार की राहत व्यवस्था और लॉकडाउन की तैयारियों पर सवाल उठाए थे। 

वहीं केंद्र सरकार ने मुफ्त राशन वितरण और अन्य राहत योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने के प्रयासों की बात कही थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के दौरान सबसे अधिक प्रभाव समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए अधिक प्रभावी सामाजिक सुरक्षा और राहत व्यवस्था की आवश्यकता है।

यदि आप इसे किसी विशेष अख़बार (जैसे दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण या जनसत्ता) की शैली में चाहते हैं, तो मैं उसी अंदाज़ में भी तैयार कर सकता हूँ।

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