श्रीशैलम।आंध्रप्रदेश। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग। धार्मिक महत्व। पौराणिक कथा। मंदिर की विशेषता। कैसे पहुंचे। दर्शन करने का सर्वोत्तम समय।
यहाँ भगवान शिव “मल्लिकार्जुन” और माता पार्वती “भ्रामराम्बा” के रूप में विराजमान हैं।
धार्मिक महत्व:

यहाँ भगवान शिव “मल्लिकार्जुन” और माता पार्वती “भ्रामराम्बा” के रूप में विराजमान हैं।
यह स्थान एक साथ ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ दोनों है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश होता है।
पौराणिक कथा:

दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश होता है।
कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती अपने पुत्र कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैल पर्वत पर आए थे। वहीं शिवजी ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए और “मल्लिकार्जुन” कहलाए।
मल्लिका = माता पार्वती
अर्जुन = भगवान शिव
द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला
विशाल गोपुरम और पत्थरों की नक्काशी
कृष्णा नदी के पास प्राकृतिक सुंदरता
महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव
सड़क मार्ग से श्रीशैलम अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
दर्शन का सर्वोत्तम समय:
अक्टूबर से मार्च तथा महाशिवरात्रि का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
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