ईरानी गायिका परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा, कला जगत में रोष।

ईरानी गायिका परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा, कला जगत में रोष।

उम्र : 21 मार्च 1997।

बिना हिजाब ऑनलाइन प्रस्तुति देने पर कार्रवाई; कलाकारों और मानवाधिकार संगठनों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला जगत में रोष।

74 कोड़ों की सजा सुनाए जाने कलाकारों में रोष।

तेहरान/अंतरराष्ट्रीय डेस्क।

ईरान की युवा गायिका Parastoo Ahmadi को कथित रूप से 74 कोड़ों की सजा सुनाए जाने के बाद दुनिया भर के कलाकारों, संगीत प्रेमियों और मानवाधिकार संगठनों में नाराज़गी फैल गई है। 

रिपोर्टों के अनुसार, अहमदी ने वर्ष 2024 में बिना हिजाब एक ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया था, जिसे ईरानी अधिकारियों ने “अनैतिक” और “सार्वजनिक शिष्टाचार के विरुद्ध” माना।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अहमदी और उनकी प्रस्तुति से जुड़े अन्य कलाकारों पर 74 कोड़ों की सजा के साथ-साथ दो वर्षों तक देश छोड़ने और कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।

इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि गायन और संगीत प्रस्तुति को अपराध की तरह दंडित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अहमदी के समर्थन में आवाज उठाई है।

संगीत जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि किसी कलाकार को उसकी कला और अभिव्यक्ति के लिए शारीरिक दंड देना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी रचनात्मक दुनिया का अपमान है। 

इस घटना ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों और कलाकारों पर बढ़ते दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

संपादकीय टिप्पणी:

कला और संगीत सीमाओं से परे मानवता की साझा धरोहर अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अहमदी और उनकी प्रस्तुति से जुड़े अन्य कलाकारों पर 74 कोड़ों की सजा के साथ-साथ दो वर्षों तक देश छोड़ने और कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।

इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि गायन और संगीत प्रस्तुति को अपराध की तरह दंडित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अहमदी के समर्थन में आवाज उठाई है।

संगीत जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि किसी कलाकार को उसकी कला और अभिव्यक्ति के लिए शारीरिक दंड देना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी रचनात्मक दुनिया का अपमान है। 

इस घटना ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों और कलाकारों पर बढ़ते दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कला और संगीत सीमाओं से परे मानवता की साझा धरोहरअदालती दस्तावेजों के अनुसार, अहमदी और उनकी प्रस्तुति से जुड़े अन्य कलाकारों पर 74 कोड़ों की सजा के साथ-साथ दो वर्षों तक देश छोड़ने और कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।

इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि गायन और संगीत प्रस्तुति को अपराध की तरह दंडित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अहमदी के समर्थन में आवाज उठाई है।

संगीत जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि किसी कलाकार को उसकी कला और अभिव्यक्ति के लिए शारीरिक दंड देना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी रचनात्मक दुनिया का अपमान है। 

इस घटना ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों और कलाकारों पर बढ़ते दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कला और संगीत सीमाओं से परे मानवता की साझा धरोहर हैं। किसी कलाकार को उसके गीत या प्रस्तुति के कारण कठोर शारीरिक दंड देना वैश्विक सांस्कृतिक समुदाय के लिए चिंता का विषय है।

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