वाशिंगटन एजेंसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान उस समय के व्यापक तनावों से जुड़ा माना जाता है,खासकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच रिश्तों को लेकर।

वाशिंगटन एजेंसी:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान उस समय के व्यापक तनावों से जुड़ा माना जाता है,खासकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच रिश्तों को लेकर

।।नाटो हेड मुख्यालय।। बेल्जियम।।

ट्रम्प ने आरोप लगाया कि यदि नाटों जैसे सहयोगी संगठन किसी संभावित संघर्ष (जैसे ईरान के साथ) में अमेरिका का साथ नहीं देते, तो यह गठबंधन की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है।
जीडीपी का कम से कम 2% रक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा नहीं कर रहे थे। 

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव रहा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और सैन्य टकराव की आशंका शामिल रही है। नाटो एक सामूहिक सुरक्षा संगठन है, लेकिन उसके सदस्य देश हर स्थिति में स्वत: युद्ध में शामिल हों,यह जरूरी नहीं है।ट्रम्प अक्सर नाटो देशों पर “कम योगदान” और “पर्याप्त समर्थन न देने” का आरोप लगाते रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया कि यदि नाटों जैसे सहयोगी संगठन किसी संभावित संघर्ष में अमेरिका का साथ नहीं दिया।
इसका मतलब क्या है:-
यह बयान ज़्यादा राजनीतिक दबाव और कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाता है, न कि किसी घोषित युद्ध की वास्तविक स्थिति के रूप में।
यह बात सही है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बार नाटों देशों पर “कम योगदान” और “पर्याप्त समर्थन न देने” का आरोप लगाया।
ट्रम्प का सबसे बड़ा मुद्दा था कि नाटो के कई सदस्य देश अपनी जीडीपी का कम से कम 2% रक्षा पर खर्च करने के लक्ष्य को पूरा नहीं कर रहे थे। उनका कहना था कि अमेरिका ज़्यादा बोझ उठा रहा है।उदाहरण के लिए,जर्मनी जैसे बड़े देश भी लंबे समय तक इस लक्ष्य से नीचे रहे।

ट्रम्प ने कहा कि कुछ देश अमेरिका की सुरक्षा छतरी का फायदा तो उठाते हैं, लेकिन खुद उतना योगदान नहीं देते इसे उन्होंने “free-riding” कहा।

उन्होंने कई बार यह भी संकेत दिया कि अगर सहयोगी देश पर्याप्त योगदान नहीं देते, तो अमेरिका उनकी रक्षा के लिए उतना प्रतिबद्ध नहीं रहेगा, लेकिन  यह नाटो के सिद्धांतों के विपरीत एक विवादित बयान था।

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