मास्को।कीव।अजोव सागर में यूक्रेन का बड़ा हमला, पांच जहाज़ बने निशाना।

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अजोव सागर में यूक्रेन का बड़ा हमला, पांच जहाज़ बने निशाना।

अजोव सागर में यूक्रेन का बड़ा हमला, पांच जहाज़ बने निशाना

मॉस्को/कीव, 6 जून: यूक्रेन ने अजोव सागर (Sea of Azov) में रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्रों के पास पांच जहाज़ों पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है। यूक्रेनी ड्रोन बलों के अनुसार, हमले में मालवाहक जहाज़ों और एक टैंकर को निशाना बनाया गया, जिन पर यूक्रेन ने सैन्य सामग्री और कथित तौर पर कब्जे वाले क्षेत्रों से अनाज ढोने का आरोप लगाया है।

रूस ने आरोप लगाया है कि हमले में दो मालवाहक जहाज़ों — नात्रा (Natra) और ज़िरकॉन (Zircon) को नुकसान पहुंचा। इन जहाज़ों पर सवार अज़रबैजान के नागरिकों में कम से कम पांच लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को "आतंकी हमला" बताते हुए इसकी निंदा की है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि निशाना बनाए गए जहाज़ रूस के युद्ध प्रयासों में सहयोग कर रहे थे।

इस घटना के बाद अजोव सागर और काला सागर क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच जारी युद्ध में समुद्री मार्गों और बंदरगाहों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।




मॉस्को, 6 जून। अजोव सागर में यूक्रेन का ड्रोन अटैक: पांच जहाज़ निशाने पर, 5 लोगों की मौत।

मॉस्को, 6 जून। अजोव सागर में यूक्रेन का ड्रोन अटैक: पांच जहाज़ निशाने पर, 5 लोगों की मौत।

मॉस्को, 6 जून। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अजोव सागर में यूक्रेन ने बड़ा ड्रोन हमला किया है। यूक्रेन ने दावा किया कि उसके ड्रोन ने रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों के बंदरगाहों और तटीय जलक्षेत्र में पांच जहाज़ों को निशाना बनाया। वहीं इस हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत और तीन के घायल होने की खबर है।

यूक्रेनी ड्रोन बलों के कमांडर Robert Brovdi ने कहा कि हमले में ऐसे मालवाहक जहाज़ों और एक टैंकर को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से यूक्रेनी अनाज, सैन्य सामग्री और ईंधन के परिवहन में किया जा रहा था। यूक्रेन का आरोप है कि इन जहाज़ों की पहचान छिपाई गई थी और उनके रडार बंद थे।

रूस के अनुसार, हमले में Natra और Zircon नामक दो कार्गो जहाज़ प्रभावित हुए। Azerbaijan के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों जहाज़ों पर कुल 25 अज़रबैजानी नागरिक सवार थे। हमले में पांच नागरिकों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए, जिन्हें येस्क के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रूस ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे नागरिक जहाज़ों पर हमला बताया है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि कार्रवाई सैन्य और रसद आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने के लिए की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि अजोव सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस युद्ध के समुद्री मोर्चे को और अधिक संवेदनशील बना रही हैं।


नई दिल्ली। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का बढ़ रहा दायरा, जानिए कौन-कौन सी गाड़ियां हैं शामिल।

नई दिल्ली। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का बढ़ रहा दायरा, जानिए कौन-कौन सी गाड़ियां हैं शामिल।

पुराने वाहनों के लिए यह लाभ नहीं मिल सकता है।

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर तेजी से काम हो रहा है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों (E20, E85 से लेकर E100 तक) पर चल सकते हैं। केंद्र सरकार भी इस तकनीक को प्रोत्साहित कर रही है।

हाल ही में Maruti Suzuki ने भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार के रूप में Maruti Suzuki Wagon R Flex Fuel पेश की है, जो 100 प्रतिशत इथेनॉल पर भी चलने में सक्षम बताई जा रही है।

इसके अलावा, ऑटोमोबाइल कंपनियां कई अन्य फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल बाजार में लाने की तैयारी कर रही हैं। 

इनमें प्रमुख रूप से:-

Toyota Taisor Flex Fuel:-

टोयोटा और अन्य कंपनियों की कुछ E85/E100 समर्थित एसयूवी एवं कारें (प्रस्तावित मॉडल)

दोपहिया वाहन श्रेणी में भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक ने दस्तक दे दी है। Hero Moto Corp ने हाल ही में:

Hero Splendor Plus Flex Fuel

Hero HF Deluxe Flex Fuel

को लॉन्च किया है। ये मोटरसाइकिलें इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल सकती हैं और इनकी बिक्री जुलाई 2026 से शुरू होने की घोषणा की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों को इथेनॉल उत्पादन से लाभ मिलेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

मुख्य फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (भारत में उपलब्ध/घोषित):

Maruti Suzuki Wagon R Flex Fuel

Hero Splendor Plus Flex Fuel

Hero HF Deluxe Flex Fuel

Toyota Taisor Flex Fuel (प्रस्तावित)

निष्कर्ष: फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भारत के ऑटो सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है, जहां वाहन चालक पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल आधारित ईंधन का भी उपयोग कर सकेंगे।

नई दिल्ली: मोदी सरकार लाई ₹20 सस्ता ईंधन, E85 पेट्रोल हुआ लॉन्च।

 मुख्य समाचार:

मोदी सरकार लाई ₹20 सस्ता ईंधन, E85 पेट्रोल हुआ लॉन्च।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने E85 (85% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल लॉन्च करने की घोषणा की है। 

नई दिल्ली, 5 जून 2026: केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं और किसानों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए E85 (85% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल लॉन्च करने की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि यह ईंधन सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग ₹20 प्रति लीटर सस्ता होगा और इससे देश का आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता भी कम होगी।

सरकार के अनुसार, E85 ईंधन का उपयोग विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जा सकेगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन मिलेगा, बल्कि गन्ना और अन्य एथेनॉल उत्पादन से जुड़े किसानों को भी लाभ होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि E85 का लाभ केवल उन्हीं वाहन मालिकों को मिलेगा जिनके वाहन इस ईंधन के अनुकूल हैं। सामान्य पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में फिलहाल कोई ₹20 प्रति लीटर की सीधी कटौती नहीं की गई है।

क्या है E85?

85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण

सामान्य पेट्रोल से लगभग ₹20 सस्ता

केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उपयुक्त

आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मददगार

किसानों की आय बढ़ाने की संभावना

श्रीशैलम। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग। धार्मिक महत्व। पौराणिक कथा। मंदिर की विशेषता। कैसे पहुंचे। दर्शन करने का सर्वोत्तम समय।

श्रीशैलम।आंध्रप्रदेश। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग। धार्मिक महत्व। पौराणिक कथा। मंदिर की विशेषता। कैसे पहुंचे। दर्शन करने का सर्वोत्तम समय।

यहाँ भगवान शिव “मल्लिकार्जुन” और माता पार्वती “भ्रामराम्बा” के रूप में विराजमान हैं।

धार्मिक महत्व:

यह स्थान एक साथ ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ दोनों है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश होता है।

पौराणिक कथा:


मल्लिका = माता पार्वती
अर्जुन = भगवान शिव


द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला
विशाल गोपुरम और पत्थरों की नक्काशी
कृष्णा नदी के पास प्राकृतिक सुंदरता
महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव


सड़क मार्ग से श्रीशैलम अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

दर्शन का सर्वोत्तम समय:

अक्टूबर से मार्च तथा महाशिवरात्रि का समय सबसे उत्तम माना जाता है।

श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश),मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, शिवभक्ति में डूबा श्रीशैलम।

श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश),मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, शिवभक्ति में डूबा श्रीशैलम।

श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश), संवाददाता।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में दूसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह श्रीशैलम मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में स्थित है, जो आंध्र प्रदेश के नल्लमाला पर्वत और कृष्णा नदी के तट पर है।

भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 

आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में देश के विभिन्न राज्यों से भक्त पहुंचकर भगवान शिव और माता भ्रामराम्बा के दर्शन कर रहे हैं।

नल्लमाला पर्वतमाला और कृष्णा नदी के रमणीय तट पर स्थित यह प्राचीन तीर्थस्थल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। 

मान्यता है कि यहां भगवान शिव मल्लिकार्जुन तथा माता पार्वती भ्रामराम्बा के रूप में विराजमान हैं। 

यही कारण है कि यह स्थान ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ, दोनों रूपों में विशेष महत्व रखता है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, विशेष पर्वों और अवकाश के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। 

भक्तों की सुविधा के लिए दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है।

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती अपने पुत्र कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैल पर्वत पर आए थे। 

इसी स्थान पर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए, जिसके बाद यह तीर्थ ‘मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मंदिर की भव्य द्रविड़ शैली की वास्तुकला, विशाल गोपुरम और उत्कृष्ट पत्थर नक्काशी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। 

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना से भक्तों को आध्यात्मिक शांति तथा पुण्य की प्राप्ति होती है। 

यही कारण है कि श्रीशैलम देश के प्रमुख शिव तीर्थों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

प्रभास पाटन (गुजरात)#सोमनाथ मंदिर का महत्व#इतिहास#स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की मान्यता#बार बार पुनर्निमाण#श्री कृष्ण से संबंध# दर्शन की जानकारी#दर्शन के दौरान देखने योग्य स्थान#इतिहास और रहस्यों का अद्भुत संगम।

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भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले।

सोमनाथ मंदिर:आस्था, इतिहास और रहस्यों का अद्भुत संगम।

प्रभास पाटन (गुजरात), संवाददाता।

अरब सागर के तट पर स्थित Somnath Temple आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रेम माने जाने वाले इस मंदिर को भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का गौरव कहा जाता है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन करने श्राप से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर यहीं श्राप से मुक्ति प्राप्त की थी, जिसके कारण इस तीर्थ का नाम "सोमनाथ" पड़ा। मंदिर का इतिहास संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथा से भरा हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। स्वतंत्र भारत में मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य Sardar Vallabhbhai Patel की प्रेरणा से शुरू हुआ और 1951 में इसका उद्घाटन Rajendra Prasad ने किया।

मंदिर का एक प्रमुख आकर्षण "बाणस्तंभ" है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक बीच में कोई भूभाग नहीं है। यह तथ्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच विशेष जिज्ञासा का विषय बना रहता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान Krishna के पृथ्वी से प्रस्थान से जुड़े कई पवित्र स्थल भी मंदिर के आसपास स्थित हैं। इनमें Bhalka Tirth और Triveni Sangam प्रमुख हैं।

प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शाम के समय आयोजित होने वाला साउंड एंड लाइट शो मंदिर के गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है, जो दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और अदम्य संकल्प का प्रतीक है। समुद्र की लहरों के बीच खड़ा यह भव्य मंदिर आज भी सनातन परंपरा की अमर गाथा सुनाता है।

Somnath Temple (सोमनाथ मंदिर) भारत के सबसे प्राचीन और पूजनीय शिव मंदिरों में से एक है। इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है और यह Prabhas Patan में Gujarat के अरब सागर तट पर स्थित है।

सोमनाथ मंदिर का महत्व:

"सोमनाथ" का अर्थ है "चंद्रमा के स्वामी"।

पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्रदेव (सोम) ने यहाँ भगवान शिव की तपस्या की थी और उनके आशीर्वाद से श्रापमुक्त हुए थे।

यह मंदिर हिंदू धर्म में आस्था, पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक धैर्य का प्रतीक माना जाता है।

इतिहास:

सोमनाथ मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है। विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों और परंपराओं के अनुसार मंदिर को कई बार नष्ट किया गया और फिर पुनर्निर्मित किया गया।

विशेष रूप से:

Mahmud of Ghazni ने 1025 ईस्वी में मंदिर पर आक्रमण किया था।

बाद की शताब्दियों में भी मंदिर को कई बार क्षति पहुँची।

वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्रता के बाद हुआ, जिसका समर्थन Sardar Vallabhbhai Patel ने किया था।

वर्तमान संरचना का उद्घाटन 1951 में Rajendra Prasad द्वारा किया गया।

सोमनाथ मंदिर के रहस्य और रोचक तथ्य:

1. बाणस्तंभ (Arrow Pillar) का रहस्य:-

मंदिर के दक्षिणी समुद्र तट पर एक स्तंभ है जिसे बाणस्तंभ कहा जाता है। उस पर अंकित है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक बीच में कोई भूभाग नहीं है। यह तथ्य लोगों में विशेष आकर्षण का विषय है क्योंकि मंदिर समुद्र के किनारे स्थित है।

2. स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की मान्यता:-

भक्तों की मान्यता है कि यहाँ स्थित शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। यह धार्मिक आस्था का विषय है और ऐतिहासिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

3. बार-बार पुनर्निर्माण:-

मंदिर का अनेक बार विनाश और पुनर्निर्माण होना इसे भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष स्थान देता है। कई लोग इसे सनातन परंपरा की दृढ़ता का प्रतीक मानते हैं।

4. श्रीकृष्ण से संबंध:-

हिंदू परंपरा के अनुसार Krishna ने अपने अवतार का अंतिम समय इसी क्षेत्र में बिताया था। निकट स्थित Bhalka Tirth और Triveni Sangam इसी कथा से जुड़े तीर्थ स्थल माने जाते हैं।

दर्शन की जानकारी:-

मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। प्रातःकाल, दोपहर और सायंकाल आरती होती है। शाम का साउंड एंड लाइट शो भी लोकप्रिय है, जिसमें मंदिर का इतिहास प्रस्तुत किया जाता है।

दर्शन के दौरान देखने योग्य स्थान:-

Somnath Temple

Bhalka Tirth

Triveni Sangam

Somnath Beach

Gita Mandir

सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। इसकी भव्यता, समुद्र तट का वातावरण और इससे जुड़ी कथाएँ इसे भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में स्थान दिलाती हैं।


सियोल / प्योंगयांग, 5 जून 2026 उत्तर कोरिया बना रहा “तबाही का कारखाना”, परमाणु कार्यक्रम तेज।

सियोल / प्योंगयांग, 5 जून 2026 उत्तर कोरिया बना रहा “तबाही का कारखाना”, परमाणु कार्यक्रम तेज।

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश के परमाणु कार्यक्रम को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। 

सरकारी मीडिया KCNA के अनुसार, किम ने हाल ही में एक नए परमाणु सामग्री उत्पादन केंद्र का निरीक्षण किया और देश की परमाणु क्षमता को “बहु-गुणा” बढ़ाने का आदेश दिया।
कुछ वर्षों में उत्पादन क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया लगातार अपने यूरेनियम संवर्धन और हथियार-ग्रेड सामग्री उत्पादन को बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है और भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और गहरी हो गई है।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका पहले ही उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध जारी रखे हुए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को और बढ़ा सकता है और वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। 

नई दिल्ली।रेल मंत्रालय। रेल भवन।मंडल रेल प्रबंधक।रेल महाप्रबंधक।।कुलियों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश, ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध में उठी आवाज।

नई दिल्ली। रेल मंत्रालय।रेल भवन। रेल महाप्रबंधक। मंडल रेल प्रबंधक।कुलियों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश, ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध में उठी आवाज।

रेलवे कुलियों ने आवाज उठाई ठेकेदारी प्रथा बंद करो।बंद करो। रेल मंत्री हाय हाय। वित्त मंत्री हाय हाय। प्रधानमंत्री हाय हाय के नारे लगाए।
बरौनी, प्रतिनिधि।
रेल मंत्रालय। रेल भवन।रेलवे कुलियों के कार्य को ठेकेदारी व्यवस्था से जोड़ने के फैसले के बाद कुलियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। 

सभी रेलवे जंक्शन सहित कई स्टेशनों पर कार्यरत कुलियों का आरोप है कि उनकी वर्षों पुरानी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है, जबकि उनकी समस्याओं और मांगों को सुनने के लिए न तो रेलवे प्रशासन तैयार है और न ही सरकार गंभीर पहल कर रही है।

कुलियों का कहना है कि रेलवे यात्रियों की सुविधा के नाम पर निजी एजेंसियों को काम सौंप रही है, लेकिन लंबे समय से सेवा दे रहे कुलियों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। 

उनका आरोप है कि सरकार एक ओर रोजगार और श्रमिक हितों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक रोजगार व्यवस्था को कमजोर करने वाले निर्णय लिए जा रहे हैं।

बरौनी स्टेशन के कुलियों ने कहा कि कई बार अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इससे कुलियों और उनके परिवारों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

कुली संगठनों ने मांग की है कि ठेकेदारी व्यवस्था लागू करने से पहले वर्तमान कुलियों के हितों की रक्षा की जाए तथा उनके साथ संवाद स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।

हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कुलियों को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।

नई दिल्ली।5 जून। सुप्रीम कोर्ट।सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अटेंडेंट की बहाली पर लगाई अंतरिम रोक।

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट।सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अटेंडेंट की बहाली पर लगाई अंतरिम रोक।
जस्टिस R. Mahadevanकी पीठ ने बैंक अटेंडेंट की बहाली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
नई दिल्ली, 5 जून।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस Ahsanuddin Amanullah और जस्टिस R. Mahadevanकी पीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले में बैंक अटेंडेंट की बहाली के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई होने तक बहाली के आदेश को प्रभावी नहीं रहने दिया जाएगा। 

अदालत ने मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि बहाली का आदेश कानून और सेवा नियमों के अनुरूप नहीं है, जबकि कर्मचारी पक्ष ने आदेश को उचित बताते हुए उसे बरकरार रखने की मांग की। 

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम राहत देते हुए बहाली पर रोक लगाने का आदेश पारित किया।

मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत सभी कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। 

इस आदेश के बाद संबंधित बैंक और कर्मचारी के बीच चल रहा विवाद फिलहाल यथास्थिति में बना रहेगा।