रेलवे कुलियों की बदहाली पर सवाल: रोजगार की मांग के बीच एक कुली की मौत ।

प्रयागराज/नई दिल्ली। रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों का सामान उठाकर परिवार का पेट पालने वाले लाइसेंसधारी कुलियों की आर्थिक स्थिति और रोजगार का सवाल एक बार फिर चर्चा में है। प्रयागराज जंक्शन पर 13 अक्टूबर 2026 को एक कुली की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतक लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। हालांकि, उनकी मौत के पीछे आत्महत्या की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्टों में मृतक की पहचान सतन निषाद के रूप में की गई है। बताया गया कि वह लगभग 15 वर्षों से स्टेशन पर कुली का काम कर रहे थे। घटना के बाद साथी कुलियों ने आर्थिक परेशानियों और काम की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने रेलवे प्रशासन से अपनी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
स्थायी रोजगार की मांग कब पूरी होगी?
देशभर में लाइसेंसधारी रेलवे कुलियों का एक वर्ग लंबे समय से रेलवे के ग्रुप-डी पदों पर समायोजन या नियुक्ति की मांग करता रहा है। उनका कहना है कि वे वर्षों से रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की सेवा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी रोजगार सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिलतीं।
कुलियों की मांग है कि पात्रता और लागू नियमों के आधार पर उनके रोजगार के प्रश्न पर स्पष्ट नीति बनाई जाए। साथ ही, उनकी आजीविका प्रभावित करने वाली समस्याओं पर रेलवे प्रशासन गंभीरता से विचार करे।
रेलवे प्रशासन और सरकार से पांच सवाल
वर्षों से रेलवे स्टेशनों पर काम कर रहे लाइसेंसधारी कुलियों के रोजगार और आर्थिक सुरक्षा के लिए क्या ठोस योजना है?
ग्रुप-डी पदों पर कुलियों के समायोजन या नियुक्ति की मांग पर सरकार की वर्तमान नीति क्या है?
जिन स्टेशनों पर कुलियों का काम घटा है, वहां उनकी आजीविका सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
कुलियों की मांगों पर रेलवे बोर्ड ने अब तक क्या निर्णय लिए हैं?
क्या रेलवे प्रशासन कुलियों की समस्याओं पर समयबद्ध समीक्षा कर अपनी कार्रवाई सार्वजनिक करेगा?
अब ठोस कार्रवाई की जरूरत
रेलवे कुलियों की समस्याएं केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं। कमाई में कमी, परिवार के भरण-पोषण की चिंता और भविष्य की अनिश्चितता भी उनके लिए गंभीर चुनौतियां हो सकती हैं। प्रयागराज की घटना ने इन परिस्थितियों पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की मौत को केवल बेरोजगारी का परिणाम मान लेना उचित नहीं होगा, जब तक जांच में इसकी पुष्टि न हो। फिर भी, ऐसी घटनाओं के बाद रेलवे प्रशासन को प्रभावित कर्मचारियों की समस्याओं की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरतमंद श्रमिकों के लिए उपलब्ध सहायता की जानकारी देनी चाहिए।
सवाल यही है कि रेलवे की व्यवस्था में वर्षों से योगदान देने वाले कुलियों की आजीविका और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार और रेलवे बोर्ड ठोस कदम कब उठाएंगे?