सुपरबग्स पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर घटा, दुनिया के लिए बढ़ा खतरा।

सुपरबग्स पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर घटा, दुनिया के लिए बढ़ा खतरा।

विशेष संवाददाता।

नई दिल्ली, 15 जून। दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते और गलत इस्तेमाल के कारण "सुपरबग्स" तेजी से फैल रहे हैं। 

ये ऐसे बैक्टीरिया हैं जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं, जिससे साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है।

हालिया वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, वर्ष 2023 में दुनिया भर में पाए गए लगभग हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण पर एंटीबायोटिक दवाओं का प्रभाव नहीं हुआ। 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ई. कोलाई (E. coli) और क्लेब्सिएला न्यूमोनिए (Klebsiella pneumoniae) जैसे बैक्टीरिया कई प्रमुख एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं। 

इससे डॉक्टरों को "लास्ट-रिजॉर्ट" यानी अंतिम विकल्प वाली शक्तिशाली दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।

जभारत में भी एंटीबायोटिक प्रतिरोध (AMR) चिंता का विषय बना हुआ है। अस्पतालों में किए गए अध्ययनों में पाया गया कि बड़ी संख्या में मरीजों को बिना पर्याप्त जांच के एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं, जिससे सुपरबग्स के विकसित होने का खतरा बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक उपयोग, अधूरा उपचार और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। 

यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में सामान्य सर्जरी, प्रसव और छोटे संक्रमणों का इलाज भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।

क्या करें?

डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें।

निर्धारित दवा का पूरा कोर्स पूरा करें।

वायरल बीमारियों (जुकाम, फ्लू आदि) में एंटीबायोटिक का अनावश्यक उपयोग न करें।

स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन करें।सुपरबग्स का बढ़ता खतरा स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चेतावनी है। एंटीबायोटिक दवाओं का जिम्मेदार उपयोग ही इस संकट को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।


टेलर ने जिस कुर्सी पर बैठकर मैच देखा, अब होगी उसकी नीलामी।

टेलर ने जिस कुर्सी पर बैठकर मैच देखा, अब होगी उसकी नीलामी।

प्रशंसकों में उत्साह, यादगार वस्तु को खरीदने के लिए लग सकती है बड़ी बोली

समाचार रिपोर्ट: अमन कुमार मिश्र।

नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायिका Taylor Swift जिस कुर्सी पर बैठकर एक चर्चित मैच का आनंद लिया था, अब उसकी नीलामी की तैयारी की जा रही है। आयोजकों के अनुसार, यह कुर्सी प्रशंसकों और संग्रहकर्ताओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गई है।

बताया जा रहा है कि मैच के दौरान टेलर जिस सीट पर बैठी थीं, उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए थे। इसके बाद उस कुर्सी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। अब नीलामी के जरिए इसे बेचने का निर्णय लिया गया है।

नीलामी आयोजकों का कहना है कि टेलर स्विफ्ट की वैश्विक लोकप्रियता को देखते हुए इस कुर्सी के लिए ऊंची बोली लगने की संभावना है। कई प्रशंसक और संग्रहकर्ता इसे एक यादगार वस्तु के रूप में अपने पास रखना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी मशहूर हस्ती से जुड़ी वस्तुओं की नीलामी में अक्सर अपेक्षा से अधिक कीमत मिल जाती है। ऐसे में इस कुर्सी की नीलामी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

नीलामी की तारीख और शुरुआती बोली से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द जारी किए जाने की संभावना है। फिलहाल इस खबर ने प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है।

चीन की सड़कों पर घुटनों के बल भीख मांगता दिखा हाइटेक ह्यूमनॉइड रोबोट, लोगों में कौतूहल।

Chine:Bijing, Agency। Robot News: चीन। बीजिंग, एजेंसी। रोबोटिक समाचार।

चीन: बीजिंग एजेंसी।

चीन की सड़कों पर घुटनों के बल भीख मांगता दिखा हाइटेक ह्यूमनॉइड रोबोट, लोगों में कौतूहल।

बीजिंग, संवाददाता।

चीन की एक सड़क पर उस समय लोगों की भीड़ जुट गई जब एक अत्याधुनिक ह्यूमनॉइड रोबोट घुटनों के बल बैठा हुआ दिखाई दिया। इंसान जैसी बनावट और हाव-भाव वाले इस रोबोट को देखकर राहगीर पहले तो भ्रमित हो गए कि यह कोई व्यक्ति है या मशीन।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोबोट सड़क किनारे घुटनों के बल झुका हुआ था और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वह भीख मांग रहा हो। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद इस अनोखे दृश्य को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि यह किसी कंपनी द्वारा किया गया प्रदर्शन, प्रचार अभियान या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ा प्रयोग भी हो सकता है। हालांकि, वीडियो की वास्तविक परिस्थितियों और रोबोट के उद्देश्य की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे आधुनिक तकनीक की हैरान कर देने वाली मिसाल बताया, जबकि कुछ ने इसे समाज और तकनीक के बदलते रिश्तों पर सवाल खड़े करने वाला दृश्य माना। कई उपयोगकर्ताओं ने रोबोट की इंसानों जैसी गतिविधियों और अभिव्यक्तियों पर आश्चर्य व्यक्त किया।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रोबोट को वहां किस उद्देश्य से रखा गया था, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर ह्यूमनॉइड रोबोट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती क्षमताओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से कई पोत गुप्त रूप से निकाले गए: ट्रम्प।

होर्मुज जलडमरूमध्य से कई पोत गुप्त रूप से निकाले गए: ट्रम्प।

अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में एक गुप्त अभियान चलाकर कई जहाजों और तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकाला। 

वॉशिंगटन/होर्मुज, 14 जून। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में एक गुप्त अभियान चलाकर कई जहाजों और तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकाला। ट्रम्प के अनुसार, इस अभियान के दौरान कुछ पोतों को रात के समय बिना रोशनी और सीमित संचार संकेतों के साथ मार्ग पार कराया गया, ताकि वे संभावित खतरों से बच सकें।


ट्रम्प ने कहा कि इस कार्रवाई से वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिली और ऊर्जा बाजार में संभावित उथल-पुथल को रोका जा सका। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य सहयोग से बड़ी मात्रा में तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया गया।

हालांकि, इन दावों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। समुद्री निगरानी से जुड़े कुछ विशेषज्ञों और रिपोर्टों में संकेत मिला है कि संघर्ष के दौरान कुछ जहाजों ने "डार्क मोड" में यात्रा की थी, लेकिन अभियान के पूरे पैमाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इसी बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरें भी सामने आई हैं। ट्रम्प ने कहा है कि समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए फिर से खोलने की दिशा में कदम उठाए जा सकते है।

meeting between the President of France and the Prime Minister of India.

meeting between the President of France and the Prime Minister of India.

The Prime Minister of India is Narendra Modi.

The President of France is Emmanuel Macron.

The Prime Minister of India is Narendra Modi.

They are scheduled to meet in Nice on 13–14 June 2026 during Prime Minister Modi's official visit to France. The leaders are expected to discuss strengthening the India–France strategic partnership, cooperation in technology, innovation, defense, trade, and preparations around the G7 Summit in France.

A meeting between the President of France, Emmanuel Macron, and the Prime Minister of India, Narendra Modi, would typically focus on areas such as bilateral relations, trade, defense cooperation, climate initiatives, technology, and international affairs.

If you need this for a specific purpose (e.g., a headline, news report, essay, meeting agenda, or diplomatic communiqué), let me know and I can format it accordingly.


यूरोप में जयशंकर का बड़ा खुलासा: ‘रूसी तेल खरीदने को अमेरिका ने कहा था’

यूरोप में जयशंकर का बड़ा खुलासा: ‘रूसी तेल खरीदने को अमेरिका ने कहा था।

फिनलैंड में आयोजित चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत ने रूस से तेल इसलिए खरीदा क्योंकि वह उपलब्ध था और किफायती था। 

हेलसिंकी/नई दिल्ली। 

भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने यूरोप में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर पश्चिमी देशों की आलोचना का जवाब देते हुए बड़ा खुलासा किया।

उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद 2022 में वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए अमेरिका ने भारत से रूसी तेल खरीद जारी रखने का अनुरोध किया था।

फिनलैंड में आयोजित चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत ने रूस से तेल इसलिए खरीदा क्योंकि वह उपलब्ध था और किफायती था। 

उन्होंने यह भी कहा कि उस समय वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता थी और अमेरिका स्वयं चाहता था कि बाजार में आपूर्ति बनी रहे।

विदेश मंत्री ने यूरोपीय देशों पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत के ऊर्जा संबंधी फैसले उसके राष्ट्रीय हितों के आधार पर लिए जाते हैं। 

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कई यूरोपीय देशों ने वर्षों तक ऐसे देशों को हथियार बेचे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हुआ।

जयशंकर के इस बयान को रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

उनका कहना है कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के बजाय अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देता है।

हालांकि, जयशंकर ने अपने बयान में यह नहीं कहा कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में व्यक्तिगत तौर पर डोनाल्ड ट्रम्प ने उनसे ऐसा अनुरोध किया था। 

उन्होंने अमेरिका या अमेरिकी प्रशासन द्वारा किए गए अनुरोध का उल्लेख किया।

अमेरिका ने एंथ्रोपिक के उन्नत AI मॉडल्स पर लगाया प्रतिबंध, राष्ट्रीय सुरक्षा बनी वजह।

अमेरिका ने एंथ्रोपिक के उन्नत AI मॉडल्स पर लगाया प्रतिबंध, राष्ट्रीय सुरक्षा बनी वजह।

वाशिंगटन एजेंसी द्वारा प्राप्त जानकारी अनुसार 14 जून 2026। अमेरिकी सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा।

वॉशिंगटन, 14 जून 2026।

अमेरिकी सरकार ने AI कंपनी Anthropic के सबसे उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल्स पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार का कहना है कि ये मॉडल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित जोखिम पैदा कर सकते हैं, इसलिए विदेशी नागरिकों और विदेशी उपयोगकर्ताओं की पहुंच पर रोक लगाई गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने द्वारा पूर्णतः बंद नहीं किया गया है। यह अमेरिका का दिखावा है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने Anthropic को निर्देश दिया कि वह अपने अत्याधुनिक मॉडल Claude Fable 5 और Claude Mythos 5 को विदेशी उपयोगकर्ताओं के लिए तुरंत बंद करे। कंपनी ने आदेश का पालन करते हुए इन सेवाओं को वैश्विक स्तर पर निलंबित कर दिया।

प्रतिबंध क्यों लगाया गया?

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन AI मॉडल्स का दुरुपयोग साइबर सुरक्षा खामियों की पहचान करने, संवेदनशील प्रणालियों में सेंध लगाने या उन्नत साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि ऐसी क्षमताएं गलत हाथों में जाने पर राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

क्या पूरी कंपनी पर प्रतिबंध है?

स्थिति दो हिस्सों में बंटी हुई है:

अमेरिकी संघीय एजेंसियों में Anthropic तकनीक के उपयोग पर रोक – ट्रम्प प्रशासन ने पहले संघीय एजेंसियों को Anthropic की तकनीक का उपयोग बंद करने का निर्देश दिया था।

सबसे उन्नत AI मॉडल्स पर निर्यात-नियंत्रण (Export Control)हालिया आदेश के तहत विशेष रूप से Fable 5 और Mythos 5 जैसे मॉडल विदेशी उपयोगकर्ताओं के लिए प्रतिबंधित किए गए हैं।

भारत सहित दुनिया पर असर।

इस फैसले का प्रभाव भारत समेत कई देशों के उपयोगकर्ताओं पर पड़ा है। जिन लोगों या संस्थानों को इन उन्नत मॉडल्स तक पहुंच थी, उनकी सेवाएं अचानक बंद हो गईं। यूरोपीय आयोग ने भी इस कदम के प्रभावों की समीक्षा शुरू कर दी है।

Anthropic की प्रतिक्रिया:

Anthropic ने संकेत दिया है कि उसे सरकार की चिंताओं के बारे में पर्याप्त तकनीकी जानकारी नहीं दी गई और वह इस फैसले को चुनौती देने या उसके स्पष्टीकरण की कोशिश कर रही है। कंपनी का कहना है कि व्यापक प्रतिबंध AI नवाचार को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका ने Anthropic कंपनी को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन उसके सबसे शक्तिशाली AI मॉडल्स पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम AI तकनीक को लेकर बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चिंताओं का संकेत माना जा रहा है।

वाशिंगटन: डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार ने “ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर दिया है”

वाशिंगटन: डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार ने “ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर दिया है”

तेहरान की तरफ से अधिकारिक रूप से शांति प्रस्ताव का कोई जिक्र नहीं किया गया है।


डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा मध्य-पूर्व के देशों Eकतर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सऊदी अरब  बहरीन कुवैत और पाकिस्तान के साथ हाल के समझौते संबंध में बातचीत की।

अमेरिकी राष्ट्रपति बोले युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता, तेहरान की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं

वॉशिंगटन, 13 जून।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष समाप्त हो चुका है। 

ट्रम्प ने कहा कि उनकी सरकार ने “ईरान के साथ युद्ध समाप्त कर दिया है” और दोनों देशों के बीच जल्द ही एक औपचारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

ट्रम्प के अनुसार, समझौते के अंतिम बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और मध्य पूर्व में स्थिरता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में यूरोप में शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

हालांकि, ईरान ने ट्रम्प के दावे पर सावधानीपूर्ण रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि समझौते पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और प्रस्ताव संबंधित संस्थाओं के विचाराधीन है।

इस बीच, संभावित शांति समझौते की खबर से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद है।

ईरान के साथ युद्ध समाप्त हो चुका है” राष्ट्रपति ट्रम्प के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि अंतिम समझौते की पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन दोनों देशों के बीच शांति की संभावनाओं ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का दावा, "रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ बोले"क्षेत्र पर हमारा प्रभावी नियंत्रण"

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का दावा, "रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ बोले"क्षेत्र पर हमारा प्रभावी नियंत्रण"
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने एक बयान जारी कर विश्व के लोगों को दिग्भ्रमित कर कहा होर्मुज ऑफ जलडमरूमध्य क्षेत्र अमेरिकी सरकार के पुरी नियंत्रण में है।
वॉशिंगटन, 13 जून:

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियानों और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अमेरिका का प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है तथा वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रूप से जारी है।

हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियानों ने तेल और मालवाहक जहाजों के आवागमन को सुनिश्चित किया है। उनके अनुसार, अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी और सुरक्षा व्यवस्था इतनी मजबूत है कि ईरान इसे रोक नहीं पा रहा है।

हालांकि, इस दावे को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं है और इस क्षेत्र पर उसकी संप्रभुता तथा भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालिया कूटनीतिक वार्ताओं में भी जलडमरूमध्य के प्रबंधन और सुरक्षा का मुद्दा प्रमुख बना हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है।

ट्रंप प्रशासन ने 22 अरब डॉलर से अधिक टैरिफ राशि लौटाई, भारतीयों को नहीं मिलेगा सीधा लाभ।

ट्रंप प्रशासन ने 22 अरब डॉलर से अधिक टैरिफ राशि लौटाई, भारतीयों को नहीं मिलेगा सीधा लाभ।
अमेरिका की अदालत ने डोनाल्ड ट्रम्प के द्वारा टैरिफ शुल्क पर रोक लगाई।
वॉशिंगटन, 12 जून। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन ने अमेरिकी अदालतों द्वारा अवैध घोषित किए गए कुछ आयात शुल्क (टैरिफ) के बदले अब तक 22 अरब डॉलर से अधिक की राशि वापस की है। 

आयातक कंपनियों और कारोबारियों को लौटाई जा रही है जिन्होंने यह शुल्क जमा किया था।

हालांकि यह धनराशि आम लोगों या भारतीय नागरिकों के खातों में नहीं भेजी जा रही है, बल्कि उन आयातक कंपनियों और कारोबारियों को लौटाई जा रही है जिन्होंने यह शुल्क जमा किया था।

अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा एजेंसी (CBP) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ रिफंड की प्रक्रिया शुरू की गई और अब तक अरबों डॉलर की वापसी की जा चुकी है। 

कई कंपनियों ने आंशिक भुगतान मिलने की पुष्टि भी की है।

सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने 22 अरब डॉलर भारतीय लोगों के खातों में भेज दिए हैं, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है। 

रिफंड केवल उन अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय आयातकों को दिया जा रहा है जिन्होंने संबंधित टैरिफ का भुगतान किया था।

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी कुछ राहत देने के प्रस्ताव आए हैं, लेकिन अभी तक किसी भी योजना के तहत भारतीय नागरिकों या भारत में रहने वाले लोगों को सीधे भुगतान करने की घोषणा नहीं हुई है।

मुख्य बातें:

22 अरब डॉलर से अधिक टैरिफ रिफंड जारी।

राशि आयातक कंपनियों और कारोबारियों को लौटाई जा रही है।

भारतीय लोगों के खातों में पैसा भेजे जाने का दावा गलत।

रिफंड प्रक्रिया अभी भी जारी है।