रेलवे कुलियों के भविष्य पर संकट!
प्रधानमंत्री और रेल मंत्री से सवाल आधुनिकीकरण की कीमत आखिर कुली क्यों चुकाएं?
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के स्टेशनों पर वर्षों से यात्रियों का सामान उठाकर अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले कुलियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। रेलवे के आधुनिकीकरण और बदलती व्यवस्थाओं के बीच देशभर के कुली रोजगार की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मांग उठा रहे हैं।
राष्ट्रीय कुली मोर्चा सहित कुलियों से जुड़े संगठनों ने सरकार से मांग की है कि कुली/यात्री सहायक संवर्ग को वर्ष 2008 की तर्ज पर रेलवे की स्थायी सेवाओं में समायोजित करने की प्रक्रिया फिर शुरू की जाए। साथ ही वृद्ध कुलियों के लिए पेंशन, पारिवारिक पास तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी सामने आई है।
रेलवे का विकास हो, लेकिन कुलियों की कीमत पर नहीं’
कुलियों का कहना है कि रेलवे लगातार आधुनिक सुविधाओं और नई व्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है, लेकिन उन लोगों के भविष्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा जिन्होंने दशकों तक स्टेशनों पर यात्रियों की सेवा की है। वर्ष 2025 में भी कुलियों की ओर से ग्रुप-डी की नौकरी, नियमित रोजगार, शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाएं, वर्दी और विश्राम गृह जैसी मांगें उठाई गई थीं।
कुलियों का स्पष्ट संदेश है,रेलवे का आधुनिकीकरण स्वागतयोग्य है, लेकिन विकास ऐसा नहीं होना चाहिए जिसमें वर्षों से यात्रियों का बोझ उठाने वाले कुलियों के कंधों पर उनके अपने परिवार के भविष्य का बोझ डाल दिया जाए।
अब सवाल सरकार से है: क्या देशभर के रेलवे स्टेशनों पर काम कर रहे कुलियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस फैसला होगा, या वे रोजगार की अनिश्चितता में ही अपना जीवन गुजारते रहेंगे?







