आदिवासी हटेंगे तो जंगल भी घटेंगे”राज्यपाल डी.के. जोशी।
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| राज्यपाल (उपराज्यपाल) डी.के. जोशी ने आदिवासीसमुदाय और जंगलों के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज जंगलों का प्राकृतिक संरक्षक है। |
पोर्ट ब्लेयर, संवाददाता।
राज्यपाल (उपराज्यपाल) डी.के. जोशी ने आदिवासी समुदाय और जंगलों के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज जंगलों का प्राकृतिक संरक्षक है। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासियों को उनके पारंपरिक वन क्षेत्रों से हटाया गया, तो जंगलों का संरक्षण भी प्रभावित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
जोशी ने कहा कि आदिवासी समुदाय सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीता आया है और उनकी जीवनशैली जंगलों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण की किसी भी नीति में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आदिवासी हितों, उनकी संस्कृति और आजीविका की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, टिकाऊ विकास का मार्ग वही है जिसमें पर्यावरण और स्थानीय समुदाय दोनों सुरक्षित रहें।
मुख्य बिंदु:-
आदिवासी समुदाय जंगलों के प्राकृतिक संरक्षक हैं।
वन संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर।
आदिवासी हितों और संस्कृति की रक्षा को प्राथमिकता।










