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पटना। संवाददाता।प्रथम श्रेणी से पास छात्रों को मिलेगा ₹15 हजार तक प्रोत्साहन, आवेदन शुरू।
खाड़ी क्षेत्र। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
खाड़ी क्षेत्र। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
बुधवार 3 जून 2026.खाडी क्षेत्र।मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है।
दिनांक: 3 जून 2026

बुधवार 3 जून 2026.खाडी क्षेत्र।मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है।
स्थान: खाड़ी क्षेत्र।
ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।
शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में कुछ संपत्ति को नुकसान पहुँचा है, लेकिन हताहतों की संख्या की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
इस घटना के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु जो समझना ज़रूरी हैं:
भौगोलिक महत्व: कुवैत और बहरीन खाड़ी क्षेत्र में हैं, जो तेल और समुद्री मार्गों के लिहाज से रणनीतिक रूप से अहम हैं।
अमेरिकी ठिकाने: अमेरिकी सैन्य ठिकाने अक्सर क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी के लिए मौजूद रहते हैं।
इन पर हमला सीधे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ा सकता है।
सैन्य उपकरण: मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल आमतौर पर सटीक निशाने और संदेश देने के लिए किया जाता है।
राजनीतिक परिणाम: इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय गठबंधनों, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक तेल बाजार पर असर डाल सकती हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और ईरान से तत्काल संकट को बढ़ाने वाले कदमों से परहेज करने की अपील की है।
अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय गठबंधनों के साथ मिलकर सुरक्षा बढ़ाने और जवाबी कार्रवाई के विकल्पों पर चर्चा शुरू कर दी है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते राजनीतिक तनाव और ईरान तथा पश्चिमी देशों के बीच मौजूदा विवादों का नतीजा हो सकता है।
इस हमले से वैश्विक तेल बाजार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर भी असर पड़ने की आशंका है।
कुवैत और बहरीन की स्थानीय सरकारों ने भी नागरिकों से शांति बनाए रखने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस घटना के अगले कदमों और ईरान की प्रतिक्रिया पर है।
चीन।वुहान। से फैला कोरोना वायरस, उत्पत्ति पर अब भी शोध जारी।
चीन। वुहान। से फैला कोरोना वायरस, उत्पत्ति पर अब भी शोध जारी।
वुहान, चीन (03 जून 2026) – दुनिया को बदलने वाला कोरोना वायरस COVID-19 सबसे पहले दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में सामने आया।

वुहान, चीन (03 जून 2026) – दुनिया को बदलने वाला कोरोना वायरस COVID-19 सबसे पहले दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में सामने आया।
इसके फैलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मार्च 2020 में इसे वैश्विक महामारी घोषित किया।
वैज्ञानिक जांच के अनुसार कोरोना वायरस के इंसानों में आने का तरीका अभी तक निश्चित नहीं हो पाया है।
टोक्यो,जापान। जापान में 5 साल में 31 लाख आबादी घटी, जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर।
टोक्यो,जापान। जापान में 5 साल में 31 लाख आबादी घटी, जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर।
जापान टेक्नोलॉजी क्षेत्र,जनसंख्या नियंत्रण में आगे।
टोक्यो, जापान। जापान गंभीर जनसंख्या संकट का सामना कर रहा है।
हाल ही में जारी जनगणना के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, देश की आबादी पिछले पाँच वर्षों में लगभग 31 लाख (3.09 मिलियन) घटकर करीब 12.3 करोड़ रह गई है। 
भविष्य में जनसंख्या और घटने का अनुमान।
यह जापान के इतिहास में किसी भी पाँच वर्षीय अवधि में दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट है।
वस्था और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। अब तक उनका प्रभाव सीमित रहा है। 5 वर्षों में आबादी में लगभग 31 लाख की कमी,बुजुर्ग आबादी का अनुपात लगातार बढ़ रहा है।जनसंख्या में गिरावट से श्रमिकों की कमी और आर्थिक चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं, फिर भी यह दुनिया में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण के एक अनोखे उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
विशेष तथ्य:-
5 वर्षों में लगभग 31लाख आबादी कम हुई। जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर। बुजुर्गों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है। भविष्य में जनसंख्या और घटने का अनुमान।
विश्लेषण:-
जापान का अनुभव दिखाता है कि जनसंख्या नियंत्रण और जनसंख्या गिरावट दो अलग-अलग स्थितियाँ हैं।
जहाँ अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि समस्याएँ पैदा कर सकती है, वहीं अत्यधिक कम जन्मदर भी अर्थव्यवस्था और समाज के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकती है।
जापानी लोग अपना विवाह कैसे कम खर्च में करते हैं।
मुख्य कारण:-
(1) देर से विवाह या विवाह न करना।(2) बच्चों के पालन-पोषण की ऊँची लागत।(3) लंबे कार्य घंटे और कार्य-संस्कृति।(4) तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी।(5) जन्म दर का लगातार कम बने रहना।
आबादी घटने के बावजूद Japan अभी भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन श्रमिकों की कमी और वृद्ध होती जनसंख्या उसकी सबसे बड़ी दीर्घकालिक चुनौतियों में से हैं।
भविष्य का अनुमान:-
2030 तक आबादी लगभग 11.96 करोड़ रह सकती है।
2050 तक यह घटकर लगभग 10.5 करोड़ होने का अनुमान है।
2070 तक जापान की जनसंख्या लगभग 8.7 करोड़ (87 मिलियन) तक गिर सकती है, यानी वर्तमान स्तर से लगभग 30% कम।
2025–26 के अनुमान के अनुसार जापान की आबादी लगभग 12.2–12.3 करोड़ (122–123 मिलियन) है।
कुल प्रजनन दर (एक महिला के जीवनकाल में औसतन बच्चों की संख्या) 1.15 तक गिर गई, जबकि जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए लगभग 2.1 की आवश्यकता होती है।
उसी वर्ष लगभग 16 लाख मौतें हुईं, इसलिए जन्मों की तुलना में मौतें बहुत अधिक रहीं।
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| जापान टेक्नोलॉजी क्षेत्र,जनसंख्या नियंत्रण में आगे। |
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भविष्य में जनसंख्या और घटने का अनुमान। |
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जापानी लोग अपना विवाह कैसे कम खर्च में करते हैं। |
टोक्यो। जापान बना रहा नया दांत उगाने की दवा, इंसानों पर परीक्षण जारी।
टोक्यो। जापान बना रहा नया दांत उगाने की दवा, इंसानों पर परीक्षण जारी।
टोक्यो, जापान। विशेष संवाददाता
दांत टूटने या गिरने के बाद नया दांत उगाने का सपना अब हकीकत के करीब पहुंचता दिख रहा है। जापान के वैज्ञानिक ऐसी दवा विकसित कर रहे हैं जो मानव शरीर में नए दांत उगाने में मदद कर सकती है। यह दुनिया की पहली संभावित "टूथ रीजनरेशन" (दांत पुनर्जनन) दवा मानी जा रही है, जिस पर मानव परीक्षण चल रहे हैं।

टोक्यो, जापान। विशेष संवाददाता
शोधकर्ताओं के अनुसार यह दवा USAG-1 नामक प्रोटीन को निष्क्रिय करती है, जो सामान्य रूप से अतिरिक्त दांतों की वृद्धि को रोकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रोटीन को नियंत्रित करके शरीर में मौजूद निष्क्रिय "टूथ बड्स" को सक्रिय किया जा सकता है, जिससे नया दांत विकसित हो सकता है।
जापान के Kyoto University Hospital और Kitano Hospital से जुड़े शोधकर्ताओं ने 2024 में मानव परीक्षण शुरू किए। शुरुआती चरण में दवा की सुरक्षा और प्रभाव का परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले चूहों और अन्य जानवरों पर हुए परीक्षणों में नए दांत उगने के सकारात्मक परिणाम मिले थे।
इस परियोजना से जुड़ी कंपनी Toregem BioPharma का लक्ष्य है कि यदि परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह दवा वर्ष 2030 तक आम लोगों के लिए उपलब्ध कराई जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में डेंचर, ब्रिज और डेंटल इम्प्लांट जैसे पारंपरिक उपचारों का विकल्प बन सकती है। हालांकि अभी यह शोध और परीक्षण के चरण में है, इसलिए इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा को लेकर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
नई दिल्ली में QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक (26 मई 2026)।
नई दिल्ली में QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक (26 मई 2026)।
भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली में बैठक कर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री निगरानी, आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals), साइबर सुरक्षा और उत्तर कोरिया से उत्पन्न खतरों पर चर्चा की।
बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार के दबाव या बलपूर्वक यथास्थिति बदलने के प्रयासों का विरोध करने पर जोर दिया गया।

भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली में बैठक कर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री निगरानी, आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals), साइबर सुरक्षा और उत्तर कोरिया से उत्पन्न खतरों पर चर्चा की।
विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने की नई पहलें घोषित की गईं।
27 मई 2026 को जापानी संसद ने एक कानून पारित किया जिसके तहत प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय खुफिया परिषद (National Intelligence Council) स्थापित की जाएगी।
इसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों से प्राप्त खुफिया सूचनाओं को एकीकृत करना, विदेशी जासूसी, आतंकवाद, साइबर खतरों और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समन्वित ढंग से सामना करना है।
प्रधानमंत्री परिषद के अध्यक्ष होंगे।
विदेश, रक्षा, न्याय, वित्त आदि प्रमुख मंत्रालय इसमें शामिल होंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और विदेशी प्रभाव/जासूसी गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं का केंद्रीकृत विश्लेषण किया जाएगा।
मौजूदा खुफिया ढांचे को अधिक समन्वित और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इन दोनों घटनाओं को कई विश्लेषक चीन की बढ़ती सैन्य एवं समुद्री गतिविधियों, उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम, साइबर खतरों और संवेदनशील प्रौद्योगिकियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में देखते हैं।
QUAD देशों के बीच सुरक्षा सहयोग गहरा हो रहा है, जबकि जापान अपनी खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना को अधिक केंद्रीकृत और सक्षम बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
हालाँकि जापान के भीतर कुछ राजनीतिक दलों और नागरिक अधिकार समूहों ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि खुफिया तंत्र के विस्तार से गोपनीयता और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए निगरानी और जवाबदेही के पर्याप्त प्रावधानों की आवश्यकता बनी रहेगी।
संक्षेप में, मई 2026 की ये दोनों घटनाएँ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के प्रति QUAD देशों और विशेष रूप से जापान की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता को दर्शाती हैं।
टोक्यो/वॉशिंगटन,बुधवार।QUAD बैठक और जापान के नए खुफिया कानून पर बढ़ी चर्चा, क्षेत्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया बल।
टोक्यो/वॉशिंगटन,बुधवार। QUAD बैठक और जापान के नए खुफिया कानून पर बढ़ी चर्चा, क्षेत्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया बल।
जापान और ऑस्ट्रेलिया की हालिया बैठक तथा जापान द्वारा पारित नया खुफिया कानून क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

टोक्यो/वॉशिंगटन, बुधवार। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच QUAD देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की हालिया बैठक तथा जापान द्वारा पारित नया खुफिया कानून क्षेत्रीय रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों घटनाक्रम चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों, उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम, साइबर हमलों और समुद्री सुरक्षा संबंधी चिंताओं से सीधे जुड़े हुए हैं।
QUAD बैठक में सदस्य देशों ने मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई तथा रक्षा, साइबर सुरक्षा, तकनीकी सहयोग और आपदा प्रबंधन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
वहीं जापान का नया खुफिया कानून संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा सूचनाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
इस कानून के तहत गोपनीय सूचनाओं के प्रबंधन, खुफिया साझेदारी और साइबर सुरक्षा उपायों को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
माना जा रहा है कि इससे जापान अपने सहयोगी देशों, विशेषकर अमेरिका और QUAD साझेदारों के साथ खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को और बेहतर कर सकेगा।
विश्लेषकों के अनुसार, QUAD की रणनीतिक बैठक और जापान के नए कानून का साझा उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना तथा उभरते सुरक्षा खतरों का सामूहिक रूप से सामना करना है।
इन कदमों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पटना एजेंसी:रिक्त पदों पर भर्ती और सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि 10 तारीख तक भेजने का निर्देश।
पटना एजेंसी:रिक्त पदों पर भर्ती और सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि 10 तारीख तक भेजने का निर्देश।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की विभिन्न विभागों के अधिकारी के साथ बैठक।
पटना, संवाददाता। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में राज्य के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की विभिन्न विभागों के अधिकारी के साथ बैठक।
उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सभी विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर रिक्तियों का आकलन कर भर्ती की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना की भी समीक्षा की।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि लाभार्थियों के खातों में पेंशन की राशि प्रत्येक माह की 10 तारीख तक हर हाल में भेज दी जाए,
ताकि वृद्धजन, दिव्यांग और अन्य पात्र लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने तथा योजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली। भारत-म्यांमार में अहम समझौता: सीमा सुरक्षा और दुर्लभ खनिजों पर बढ़ेगा सहयोग।
नई दिल्ली। भारत-म्यांमार में अहम समझौता: सीमा सुरक्षा और दुर्लभ खनिजों पर बढ़ेगा सहयोग।
JTC Narendra Modi और Min Aung Hlaing
नई दिल्ली, 2 जून: भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और म्यांमार के राष्ट्रपति Min Aung Hlaing के बीच नई दिल्ली में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सीमा सुरक्षा, दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ) और व्यापारिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी।
क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-म्यांमार संबंधों की व्यापक समीक्षा की और व्यापार, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण तथा रेयर अर्थ एवं क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन, उग्रवाद-रोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दिया।
सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर म्यांमार ने भारत को आश्वासन दिया कि उसकी भूमि का उपयोग भारत की सुरक्षा के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा।


क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन, उग्रवाद-रोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दिया।
दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन, उग्रवाद-रोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने पर जोर दिया।
बैठक में समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं को भी गति देने पर सहमति बनी। भारत, म्यांमार के दुर्लभ खनिज संसाधनों तक पहुंच बढ़ाने का इच्छुक है, जिससे रणनीतिक और औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और क्षेत्रीय रणनीतिक हितों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
दुर्गापुर/हैदराबाद से दुर्गापुर पहुंचे यात्रियों की परेशानी, एयरपोर्ट से बाहर निकलने के लिए सामान ढोने को मजबूर।
दुर्गापुर/हैदराबाद से दुर्गापुर पहुंचे यात्रियों की परेशानी, एयरपोर्ट से बाहर निकलने के लिए सामान ढोने को मजबूर।
एयरपोर्ट पर मे आई हेल्प यू सेंटर पर महिला प्रशासन से मदद मांगने पर मदद नहीं मिली।

काजी नजरूल इस्लाम एयरपोर्ट, दुर्गापुर।
दुर्गापुर, 2 जून। मंगलवार 5.30 शाम।

काजी नजरूल इस्लाम एयरपोर्ट, दुर्गापुर।
हैदराबाद से काजी नजरूल इस्लाम एयरपोर्ट, दुर्गापुर पहुंचे यात्रियों को मंगलवार को उस समय भारी असुविधा का सामना करना पड़ा 
एयरपोर्ट पर टैक्सी खड़ी हुई है इस पर प्रशासन का ध्यान नहीं। लेकिन टोटो रिक्शा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
जब एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकलने के लिए उन्हें अपना सामान काफी दूरी तक स्वयं ढोकर ले जाना पड़ा। 
(ई-रिक्शा) और अन्य छोटे वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के कारण उन्हें भारी लगेज लेकर पैदल चलना पड़ा।
यात्रियों का आरोप है कि एयरपोर्ट परिसर में टोटो (ई-रिक्शा) और अन्य छोटे वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के कारण उन्हें भारी लगेज लेकर पैदल चलना पड़ा, जबकि टैक्सियों को परिसर में प्रवेश की अनुमति मिलती है।
यात्रियों ने महिलाओं और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को अपना सामान लेकर लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ा।
यात्रियों ने बताया कि विमान से उतरने और सामान प्राप्त करने के बाद उन्हें एयरपोर्ट परिसर से बाहर आने में कठिनाई हुई।

एयरपोर्ट पर टैक्सी खड़ी हुई है इस पर प्रशासन का ध्यान नहीं। लेकिन टोटो रिक्शा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

(ई-रिक्शा) और अन्य छोटे वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने के कारण उन्हें भारी लगेज लेकर पैदल चलना पड़ा।
