कानून का सम्मान सर्वोपरि, सजा का फैसला केवल न्यायालय करेगा।

कानून का सम्मान सर्वोपरि, सजा का फैसला केवल न्यायालय करेगा।

बेगूसराय/पटना। किसी भी चर्चित मामले में जनता की भावनाएं और प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक होती हैं, लेकिन भारतीय कानून व्यवस्था के अनुसार किसी व्यक्ति को फांसी, आजीवन कारावास या अन्य किसी दंड का निर्णय केवल सक्षम न्यायालय ही दे सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई, आरोप या प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जाता।

संविधान और न्यायिक व्यवस्था के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। किसी भी मामले में जांच, साक्ष्य, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर अदालत अंतिम फैसला सुनाती है। दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा दी जाती है, जबकि आरोप सिद्ध नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति को राहत मिलती है।

विधि विशेषज्ञों के अनुसार न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि अदालत के अंतिम निर्णय से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया जा सकता। इसलिए किसी आरोपी को फांसी या अन्य कठोर दंड देने की मांग पर अंतिम निर्णय न्यायालय और कानून के दायरे में ही लिया जाता है।

प्रशासनिक और कानूनी मामलों में पारदर्शिता तथा त्वरित न्याय की मांग करते हुए नागरिकों ने कहा कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषी को सजा और निर्दोष को न्याय मिल सके। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला माना जाता है।

भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे IAS संजीव हंस पर कड़ी कार्रवाई की मांग, जनता में आक्रोश।

भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे IAS संजीव हंस पर कड़ी कार्रवाई की मांग, जनता में आक्रोश।

बेगूसराय/पटना। बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Sanjeev Hans पर लगे भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर जनता के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोष सिद्ध होने पर कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियों द्वारा की गई जांच में संजीव हंस और उनके सहयोगियों पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग तथा कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों ने कई स्थानों पर छापेमारी भी की थी।

सूत्रों के अनुसार, संजीव हंस से जुड़े मामलों में कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और अन्य गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। हाल के वर्षों में उनके खिलाफ कई मामलों में एजेंसियों की कार्रवाई चर्चा का विषय रही है। 

बेगूसराय सहित बिहार के विभिन्न जिलों में लोगों का कहना है कि यदि किसी भी अधिकारी पर लगे आरोप अदालत में सिद्ध होते हैं तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक निर्दोष माना जाता है। 

जनता का एक वर्ग प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग कर रहा है तथा चाहता है कि भ्रष्टाचार के मामलों का शीघ्र निपटारा हो ताकि दोषियों को सजा और निर्दोषों को न्याय मिल सके।

संजय गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि, योगदान को किया गया याद।

संजय गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि, योगदान को किया गया याद।

नई दिल्ली, 23 जून। आज पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व Sanjay Gandhi की पुण्यतिथि के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कई सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को स्मरण किया।

श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि संजय गांधी ने युवाओं को राजनीति से जोड़ने तथा देश के विकास के लिए कई पहल करने का प्रयास किया। उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को याद करते हुए कहा कि उनका नाम भारतीय राजनीति के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।

इस अवसर पर लोगों ने उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि देश उनके योगदान को आज भी याद करता है। कई श्रद्धांजलि सभाओं में उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा पर चर्चा की गई तथा उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि महान नेताओं के कार्यों और विचारों से प्रेरणा लेकर देश के विकास और जनसेवा के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। श्रद्धांजलि सभाओं का समापन दो मिनट का मौन रखकर किया गया।

क्रेमलिन ने लंदन को दी चेतावनी, यूक्रेन के मिसाइल कारखाने पर हमले के बाद बढ़ा तनाव।

According to the official, no information has been provided.


क्रेमलिन ने लंदन को दी चेतावनी, यूक्रेन के मिसाइल कारखाने पर हमले के बाद बढ़ा तनाव।

मॉस्को/लंदन, 24 जून। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 

यूक्रेन द्वारा रूस के एक महत्वपूर्ण मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स कारखाने पर किए गए हमले के बाद क्रेमलिन समर्थक हलकों से ब्रिटेन के खिलाफ कड़ी चेतावनियां सामने आई हैं। 

रूसी पक्ष का आरोप है कि पश्चिमी देशों, विशेष रूप से ब्रिटेन, की मदद के बिना ऐसे गहरे हमले संभव नहीं हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन ने हाल ही में रूस के वोरोनेझ क्षेत्र में स्थित एक मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया। 

यूक्रेनी सेना का दावा है कि यह संयंत्र रूस की मिसाइल निर्माण क्षमता के लिए महत्वपूर्ण था। हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की भी खबर है।

इसी बीच रूसी मीडिया और कुछ प्रमुख प्रचारकों ने ब्रिटेन को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा है कि यदि लंदन यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें और सैन्य सहायता देता रहा तो रूस जवाबी कदम उठा सकता है। 

कुछ रूसी टिप्पणीकारों ने यहां तक कहा कि रूस को ब्रिटेन के खिलाफ "अल्टीमेटम" जारी करना चाहिए। हालांकि, ऐसी टिप्पणियां आधिकारिक रूसी सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं मानी जातीं।

ब्रिटेन हाल के महीनों में यूक्रेन को सैन्य सहायता बढ़ाने और उसकी वायु रक्षा तथा लंबी दूरी की हमले की क्षमता मजबूत करने का समर्थन करता रहा है। लंदन में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में भी यूक्रेन को अतिरिक्त सहायता देने पर चर्चा हुई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन द्वारा रूसी सैन्य और ऊर्जा ढांचे पर लगातार बढ़ते हमलों से मॉस्को पर दबाव बढ़ा है। 

इसके जवाब में रूस की ओर से तीखी बयानबाजी और संभावित प्रतिशोध की चेतावनियां भी तेज हो गई हैं।

निष्कर्ष: यूक्रेन के ताजा हमले के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। 

हालांकि अभी तक क्रेमलिन की ओर से लंदन पर किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रूसी राजनीतिक और मीडिया हलकों की आक्रामक भाषा ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।

तारीख पर तारीख" की तर्ज पर कुलियों को "आश्वासन पर आश्वासन"रेलवे कुलियों में बढ़ता असंतोष।

भारत के वर्तमान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव शन्नी देओल की तरह भुमिका निभा रहे हैं।

तारीख पर तारीख" की तर्ज पर कुलियों को "आश्वासन पर आश्वासन"रेलवे कुलियों में बढ़ता असंतोष।

बिकानेर: रेलवे स्टेशन पर  आश्वासन की बौछार कर दी गई।

बीकानेर से विशेष रिपोर्ट:

बीकानेर। हिंदी फिल्म के एक चर्चित संवाद में अभिनेता Sunny Deol कहते हैं, "तारीख पर तारीख मिलती रही, इंसाफ नहीं मिला।

" इसी तर्ज पर रेलवे कुलियों का कहना है कि उन्हें भी वर्षों से "आश्वासन पर आश्वासन" मिल रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम अभी तक दिखाई नहीं दे रहे हैं।

हाल ही में बीकानेर में रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw के दौरे के दौरान कुली प्रतिनिधियों ने अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को उनके समक्ष रखा। 

कुलियों का कहना है कि हर बार मुलाकात के दौरान उनकी बात ध्यान से सुनी जाती है और सकारात्मक आश्वासन भी दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती।

रेलवे कुलियों का आरोप है कि बदलते समय में उनकी आजीविका पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

स्टेशन परिसरों में आधुनिक सुविधाओं और नई व्यवस्थाओं के विस्तार के बीच कुली वर्ग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। 

उनका कहना है कि रोजगार सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर लंबे समय से मांगें उठाई जा रही हैं, लेकिन समाधान की प्रक्रिया काफी धीमी है।

कुली संगठनों के अनुसार, जब भी वे रेल मंत्री या रेलवे अधिकारियों से मिलते हैं, उन्हें आश्वासन दिया जाता है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, उनका मानना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है

कुलियों की आवाज:

एक कुली प्रतिनिधि ने कहा, "हमें हर बार भरोसा दिलाया जाता है कि हमारी समस्याएं दूर होंगी, लेकिन आज भी हम उसी इंतजार में हैं। 

अब हमें आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए।"

निष्कर्ष:

रेलवे के विकास और आधुनिकीकरण के साथ-साथ स्टेशनों पर वर्षों से सेवा दे रहे कुलियों की समस्याओं के समाधान की मांग भी तेज हो रही है। कुलियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो वे अपने अधिकारों के लिए व्यापक स्तर पर आवाज उठाने को मजबूर होंगे।

बिकानेर रेलवे स्टेशन:रेलवे कुली नौसाद खान ने रेलमंत्री से की मुलाकात, ग्रुप-डी में समायोजन की मांग उठाई।

रेलवे कुली नौसाद खान ने रेलमंत्री से की मुलाकात, ग्रुप-डी में समायोजन की मांग उठाई।

बिकानेर: रेल कुली ने रेलमंत्री को राजस्थानी पाग पहना कर सम्मानित किया।

बीकानेर, 22 जून। रेलवे कुली नौसाद खान ने रेलमंत्री से मुलाकात कर देशभर के रेलवे कुलियों की समस्याओं और मांगों को उनके समक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कुलियों के भविष्य, रोजगार सुरक्षा तथा उन्हें रेलवे के ग्रुप-डी पदों में समायोजित करने की मांग प्रमुखता से उठाई।

नौसाद खान को सभी स्टेशनों पर कार्यरत रेलवे कुली ने धन्यवाद दिया।

नौसाद खान ने रेलमंत्री को बताया कि वर्षों से रेलवे स्टेशनों पर सेवा देने वाले कुली आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि अनुभवी कुलियों को उनकी सेवा और अनुभव है के आधार पर रेलवे के ग्रुप-डी पदों में समायोजित करने की योजना बनाई जाए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
उलाव हवाई अड्डे पर बातचीत दरम्यान प्रधानमंत्री ने भी रेलवे कुलियों को आश्वासन दिया था। क्या हुआ बीजेपी के सभी नेता ढग हैं।

मुलाकात के दौरान रेलमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि कुलियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदमों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वर्ष 2027 तक कुलियों के कल्याण और उनकी सुविधाओं में सुधार के लिए कुछ न कुछ ठोस प्रयास किए जाएंगे।

रेलमंत्री से मिले आश्वासन के बाद रेलवे कुलियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। नौसाद खान ने कहा कि यदि कुलियों के लिए रोजगार सुरक्षा और ग्रुप-डी में समायोजन जैसी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो इससे हजारों कुली परिवारों को लाभ मिलेगा।

रेलवे कुलियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी और लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।

ईरानी गायिका परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा, कला जगत में रोष।

ईरानी गायिका परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा, कला जगत में रोष।

उम्र : 21 मार्च 1997।

बिना हिजाब ऑनलाइन प्रस्तुति देने पर कार्रवाई; कलाकारों और मानवाधिकार संगठनों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।


74 कोड़ों की सजा सुनाए जाने कलाकारों में रोष।

तेहरान/अंतरराष्ट्रीय डेस्क।

ईरान की युवा गायिका Parastoo Ahmadi को कथित रूप से 74 कोड़ों की सजा सुनाए जाने के बाद दुनिया भर के कलाकारों, संगीत प्रेमियों और मानवाधिकार संगठनों में नाराज़गी फैल गई है। 

रिपोर्टों के अनुसार, अहमदी ने वर्ष 2024 में बिना हिजाब एक ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया था, जिसे ईरानी अधिकारियों ने “अनैतिक” और “सार्वजनिक शिष्टाचार के विरुद्ध” माना।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अहमदी और उनकी प्रस्तुति से जुड़े अन्य कलाकारों पर 74 कोड़ों की सजा के साथ-साथ दो वर्षों तक देश छोड़ने और कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।

इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि गायन और संगीत प्रस्तुति को अपराध की तरह दंडित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अहमदी के समर्थन में आवाज उठाई है।

संगीत जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि किसी कलाकार को उसकी कला और अभिव्यक्ति के लिए शारीरिक दंड देना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी रचनात्मक दुनिया का अपमान है। 

इस घटना ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों और कलाकारों पर बढ़ते दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

संपादकीय टिप्पणी:

कला और संगीत सीमाओं से परे मानवता की साझा धरोहर अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अहमदी और उनकी प्रस्तुति से जुड़े अन्य कलाकारों पर 74 कोड़ों की सजा के साथ-साथ दो वर्षों तक देश छोड़ने और कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।

इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि गायन और संगीत प्रस्तुति को अपराध की तरह दंडित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अहमदी के समर्थन में आवाज उठाई है।

संगीत जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि किसी कलाकार को उसकी कला और अभिव्यक्ति के लिए शारीरिक दंड देना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी रचनात्मक दुनिया का अपमान है। 

इस घटना ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों और कलाकारों पर बढ़ते दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कला और संगीत सीमाओं से परे मानवता की साझा धरोहरअदालती दस्तावेजों के अनुसार, अहमदी और उनकी प्रस्तुति से जुड़े अन्य कलाकारों पर 74 कोड़ों की सजा के साथ-साथ दो वर्षों तक देश छोड़ने और कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है।

इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि गायन और संगीत प्रस्तुति को अपराध की तरह दंडित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन है। 

कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर अहमदी के समर्थन में आवाज उठाई है।

संगीत जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि किसी कलाकार को उसकी कला और अभिव्यक्ति के लिए शारीरिक दंड देना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी रचनात्मक दुनिया का अपमान है। 

इस घटना ने ईरान में महिलाओं की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अधिकारों और कलाकारों पर बढ़ते दबाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

कला और संगीत सीमाओं से परे मानवता की साझा धरोहर हैं। किसी कलाकार को उसके गीत या प्रस्तुति के कारण कठोर शारीरिक दंड देना वैश्विक सांस्कृतिक समुदाय के लिए चिंता का विषय है।

कतर के शाही परिवार का उपहार स्वीकार, ट्रंप ने नए विमान का किया सार्वजनिक अनावरण।

कतर के शाही परिवार का उपहार स्वीकार, ट्रंप ने नए विमान का किया सार्वजनिक अनावरण।
लक्ज़री विमान मूल रूप से कतर से प्राप्त हुआ था और बाद में अमेरिकी सुरक्षा मानकों के अनुरूप इसमें व्यापक तकनीकी बदलाव किए गए। 

वॉशिंगटन, 21 जून:

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कतर से मिले एक विशेष बोइंग 747 विमान का सार्वजनिक अनावरण कर दिया है।

यह विमान कतर की ओर से अमेरिका को उपहार के रूप में दिया गया था और इसे अस्थायी रूप से राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान बेड़े में शामिल किया जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह लक्ज़री विमान मूल रूप से कतर से प्राप्त हुआ था और बाद में अमेरिकी सुरक्षा मानकों के अनुरूप इसमें व्यापक तकनीकी बदलाव किए गए। 

इसे नए अंतरिम “एयर फ़ोर्स वन” के रूप में उपयोग करने की तैयारी की गई है, जब तक कि नए राष्ट्रपति विमान पूरी तरह तैयार नहीं हो जाते।

इस उपहार को लेकर अमेरिकी राजनीति में बहस भी छिड़ी हुई है। विपक्षी नेताओं और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने विदेशी सरकार से इतने महंगे उपहार को स्वीकार करने पर नैतिक और कानूनी सवाल उठाए हैं। वहीं ट्रंप का कहना है कि यह विमान अमेरिकी करदाताओं के लिए लाभकारी साबित होगा और देश की जरूरतों को पूरा करेगा।
कतर सरकार ने भी इस उपहार को दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक बताया है और किसी भी प्रकार की अनुचित मंशा से इनकार किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विमान की कीमत लगभग 40 करोड़ डॉलर (करीब 3,300 करोड़ रुपये) आंकी गई है, हालांकि इसे राष्ट्रपति उपयोग के लिए तैयार करने में अतिरिक्त खर्च भी हुआ है।

जिनेवा/बुर्गेनस्टॉक। स्विट्जरलैंड में आमने-सामने होंगे अमेरिका और ईरान, अहम मुद्दों पर होगी चर्चा।

स्विट्जरलैंड में आमने-सामने होंगे अमेरिका और ईरान, अहम मुद्दों पर होगी चर्चा।
America and Iran


मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच स्विट्जरलैंड में महत्वपूर्ण वार्ता होने जा रही है। 

दोनों देशों के अधिकारी स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक क्षेत्र में मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और संघर्ष विराम जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


बैठक में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय स्थिरता तथा लेबनान और अन्य क्षेत्रों में जारी तनाव को कम करने के उपायों पर विशेष जोर रहने की संभावना है।




लेबनान में बढ़ता मानवीय संकट, मौतों के आंकड़ों पर इजराइल और लेबनान के दावों में बड़ा अंतर।

लेबनान में बढ़ता मानवीय संकट, मौतों के आंकड़ों पर इजराइल और लेबनान के दावों में बड़ा अंतर।
इजराइली अधिकारियों के अनुसार हालिया संघर्ष में अब तक 32 सैनिकों और 4 नागरिकों की मौत हुई है।

बेरूत/यरुशलम। इजराइल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष में हताहतों की संख्या को लेकर दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। 

इजराइली अधिकारियों के अनुसार हालिया संघर्ष में अब तक 32 सैनिकों और 4 नागरिकों की मौत हुई है।

वहीं, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि 2 मार्च से शुरू हुए संघर्ष में लगभग 4,000 से 5,000 लोगों की जान जा चुकी है। 

ताजा घटनाक्रम से क्षेत्र में शांति की संभावनाओं पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।

मंत्रालय के अनुसार मृतकों में बड़ी संख्या में बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। 


संघर्ष के कारण लेबनान में व्यापक तबाही हुई है। हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं। 


ताजा घटनाक्रम से क्षेत्र में शांति की संभावनाओं पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।