भारत में BYD की पहली प्लग-इन हाइब्रिड कार लॉन्च, ऑटो सेक्टर में बढ़ी हलचल।

भारत में BYD की पहली प्लग-इन हाइब्रिड कार लॉन्च, ऑटो सेक्टर में बढ़ी हलचल।
नई दिल्ली, 8 जून। चीन की प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी BYD ने भारतीय बाजार में अपनी पहली प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) कार पेश करने की घोषणा की है। 

कंपनी 9 जून को भारत में अपने पहले हाइब्रिड मॉडल का अनावरण करेगी। अब तक BYD भारत में केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री करती रही है, लेकिन यह लॉन्च कंपनी के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

कंपनी ने संकेत दिए हैं कि नया मॉडल उसकी अत्याधुनिक DM-i सुपर प्लग-इन हाइब्रिड तकनीक से लैस होगा। 

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह वाहन संभवतः Sealion 6 या Atto 2 मॉडल हो सकता है। 

हाइब्रिड तकनीक के कारण वाहन लंबी दूरी तय करने में सक्षम होगा और ईंधन दक्षता भी बेहतर रहेगी।

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि BYD का यह कदम भारतीय प्रीमियम हाइब्रिड वाहन बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। 

कंपनी का लक्ष्य उन ग्राहकों को आकर्षित करना है जो इलेक्ट्रिक वाहन की सुविधाओं के साथ लंबी दूरी की चिंता से मुक्त विकल्प चाहते हैं। 

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह हाइब्रिड SUV एक बार फुल चार्ज और फ्यूल टैंक भरने पर 1,000 किलोमीटर से अधिक की संयुक्त रेंज दे सकती है।

भारत में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की बढ़ती मांग के बीच BYD की यह एंट्री बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

कंपनी पहले से ही भारतीय बाजार में अपने कई इलेक्ट्रिक मॉडल बेच रही है और अब हाइब्रिड सेगमेंट में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रही है।

(संवाददाता) अमन कुमार मिश्र ।



भारत में BYD की पहली प्लग-इन हाइब्रिड कार, कीमत 50 लाख रुपये तक होने की संभावना।

भारत में BYD की पहली प्लग-इन हाइब्रिड कार, कीमत 50 लाख रुपये तक होने की संभावना।

नई दिल्ली, 8 जून। चीन की अग्रणी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी BYD ने भारतीय बाजार में अपनी पहली प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) कार लॉन्च करने की तैयारी पूरी कर ली है। 

कंपनी 9 जून को अपने नए हाइब्रिड मॉडल से पर्दा उठाएगी, जिससे भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है।

कंपनी द्वारा जारी टीज़र के अनुसार, नई कार अत्याधुनिक DM-i हाइब्रिड तकनीक से लैस होगी। 

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल संभवतः BYD Sealion 6 DM-i हो सकता है, जो इलेक्ट्रिक और पेट्रोल दोनों तकनीकों का संयोजन प्रदान करेगा।

बाजार रिपोर्टों के मुताबिक, इस वाहन की संभावित एक्स-शोरूम कीमत 45 लाख से 50 लाख रुपये के बीच हो सकती है। 

हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक कीमत की घोषणा नहीं की है। लॉन्च के बाद इसकी वास्तविक कीमत और फीचर्स का खुलासा किया जाएगा।

नई हाइब्रिड SUV की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी ड्राइविंग रेंज मानी जा रही है। 

दावा किया जा रहा है कि फुल चार्ज बैटरी और भरे हुए फ्यूल टैंक के साथ यह वाहन 1,000 किलोमीटर से अधिक की संयुक्त रेंज देने में सक्षम हो सकता है। 

इससे उन ग्राहकों को फायदा मिलेगा जो इलेक्ट्रिक वाहन की कम लागत और पेट्रोल इंजन की लंबी दूरी दोनों का लाभ चाहते हैं।

ऑटो उद्योग के जानकारों का कहना है कि BYD की यह एंट्री भारत के प्रीमियम SUV और हाइब्रिड सेगमेंट में नई चुनौती पेश करेगी। 

कंपनी पहले से भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री कर रही है और अब हाइब्रिड तकनीक के जरिए अपने ग्राहक आधार को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।


50 लाख रुपये की कार आम लोगों की पहुंच से दूर, BYD की नई SUV पर उठे सवाल।

50 लाख रुपये की कार आम लोगों की पहुंच से दूर, BYD की नई SUV पर उठे सवाल।

यह कार मध्यम वर्ग के लिए नहीं है और न ही गरीबों के लिए है। भारत में  9 जून को लांच करने से क्या फायदा। गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार जिसे खरीद नहीं कर सकता है


नई दिल्ली, 8 जून। चीन की वाहन निर्माता कंपनी BYD द्वारा भारत में करीब 50 लाख रुपये कीमत वाली नई हाइब्रिड SUV लॉन्च किए जाने की खबर के बीच इसकी कीमत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आम लोगों और उपभोक्ताओं का कहना है कि इतनी महंगी कार देश के अधिकांश परिवारों की पहुंच से बाहर है।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बड़ी आबादी मध्यम और निम्न आय वर्ग से जुड़ी है। ऐसे में 45 से 50 लाख रुपये कीमत वाली कार खरीदना अधिकांश लोगों के लिए संभव नहीं है। वाहन खरीदने के साथ बीमा, रखरखाव, ईंधन और अन्य खर्च भी जुड़ जाते हैं, जिससे कुल लागत और बढ़ जाती है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस श्रेणी की गाड़ियां मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग, बड़े कारोबारियों और प्रीमियम वाहन ग्राहकों को ध्यान में रखकर लॉन्च की जाती हैं। वहीं आम उपभोक्ता आमतौर पर 5 लाख से 15 लाख रुपये के बजट वाली कारों को प्राथमिकता देते हैं।

हालांकि ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा फीचर्स और लंबी रेंज जैसी सुविधाओं के कारण प्रीमियम वाहनों की कीमत अधिक होती है। इसके बावजूद कई उपभोक्ताओं का मानना है कि भारतीय बाजार में सस्ती और किफायती कारों की मांग अभी भी सबसे ज्यादा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 50 लाख रुपये की कार को "गरीबों की कार" नहीं कहा जा सकता। यह वाहन मुख्य रूप से उन ग्राहकों के लिए है जिनकी आय और क्रय क्षमता अपेक्षाकृत अधिक है। ऐसे में BYD की नई SUV तकनीकी रूप से भले ही उन्नत हो, लेकिन इसकी कीमत आम और गरीब परिवारों की पहुंच से काफी दूर नजर आती है।

संवाददाता अमन कुमार मिश्र 

रूस-भारत की दोस्ती बरकरार, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत।

रूस-भारत की दोस्ती बरकरार, रणनीतिक साझेदारी और मजबूत।

ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण

नई दिल्ली, संवाददाता। वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच भारत और रूस के संबंध मजबूत बने हुए हैं। 

दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को लगातार आगे बढ़ाया है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और रूस की साझेदारी केवल आर्थिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दशकों पुराने विश्वास और रणनीतिक सहयोग पर आधारित है।

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऊर्जा क्षेत्र में रूस भारत के प्रमुख साझेदारों में शामिल है, जबकि रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ जारी हैं। दोनों सरकारें भविष्य में आर्थिक और तकनीकी सहयोग को और विस्तार देने पर जोर दे रही हैं।

विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि रूस विभिन्न देशों के साथ अपने संबंध विकसित कर रहा है, लेकिन इससे भारत के साथ उसकी पारंपरिक मित्रता पर कोई असर नहीं पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देश कई मुद्दों पर संवाद और सहयोग बनाए हुए हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत और रूस के रिश्ते स्थिर और भरोसेमंद बने हुए हैं। यही कारण है कि दोनों देशों को आज भी एक-दूसरे का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार माना जाता है।

मुख्य बिंदु:

भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी मित्रता कायम।

रक्षा, ऊर्जा और व्यापार क्षेत्रों में सहयोग जारी।

दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर केंद्रित।

विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-भारत संबंधों में फिलहाल किसी कमजोरी के संकेत नहीं

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए गठबंधनों और समझौतों के बावजूद भारत और रूस की दोस्ती मजबूत बनी हुई है और दोनों देश भविष्य में भी सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रूस और पाकिस्तान समझौते पर चर्चा तेज, क्या रूस भारत का दुश्मन बन रहा है?

रूस और पाकिस्तान समझौते पर चर्चा तेज, क्या रूस भारत का दुश्मन बन रहा है?
दोनों देशों ने गैस पाइपलाइन, तेल व्यापार और रेलवे सहयोग जैसे कई समझौतों पर काम किया है। 
नई दिल्ली। रूस और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा, व्यापार और परिवहन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। 


दोनों देशों ने गैस पाइपलाइन, तेल व्यापार और रेलवे सहयोग जैसे कई समझौतों पर काम किया है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अपनी वैश्विक रणनीति के तहत पाकिस्तान के साथ भी रिश्ते मजबूत कर रहा है।

हालांकि, रूस के पाकिस्तान से बढ़ते संबंधों को भारत के खिलाफ कदम मानना जल्दबाजी होगी। 

हाल के वर्षों में भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा और व्यापार सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। 

दोनों देशों ने 2030 तक आर्थिक सहयोग बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया है और रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग जारी है।

रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने और उन्नत सैन्य तकनीक पर साथ काम करने की इच्छा भी जताई है। 

हाल की रिपोर्टों में रूस द्वारा भारत को उन्नत लड़ाकू विमान परियोजनाओं में सहयोग की पेशकश का उल्लेख किया गया है।

विश्लेषकों का कहना है कि रूस आज "बहु-स्तरीय विदेश नीति" अपना रहा है। 

इसलिए वह भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है। 

लेकिन आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक दृष्टि से भारत अभी भी रूस का कहीं अधिक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है।

निष्कर्ष: रूस और पाकिस्तान के बीच समझौते हुए हैं, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि रूस भारत का दुश्मन बन गया है। 

रूस और भारत के संबंध अभी भी मजबूत रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं।

सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026 गूगल और xAI के बीच हुआ अरबों डॉलर का AI समझौता।

सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026 गूगल और xAI के बीच हुआ अरबों डॉलर का AI समझौता।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दुनिया में एक बड़ा कारोबारी समझौता सामने आया है। 

सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026।


रिपोर्टों के अनुसार, इस सौदे के तहत Google अक्टूबर 2026 से जून 2029 तक प्रति माह लगभग 92 करोड़ डॉलर (920 मिलियन डॉलर) का भुगतान करेगा।


इन संसाधनों का उपयोग Google अपने AI प्लेटफ़ॉर्म और उन्नत भाषा मॉडलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा AI उद्योग में कंप्यूटिंग शक्ति की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है। 

AI मॉडल पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, जिसके कारण बड़ी तकनीकी कंपनियों को विशाल डेटा सेंटरों और अत्याधुनिक चिप्स की जरूरत पड़ रही है।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब SpaceX और xAI के एकीकरण के बाद एलन मस्क की कंपनी AI अवसंरचना (Infrastructure) के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही है। 

हाल ही में कंपनी ने अन्य AI कंपनियों के साथ भी बड़े कंप्यूटिंग समझौते किए हैं, जिससे वह AI क्षेत्र में एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता के रूप में उभर रही है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह सौदा न केवल Googleकी AI महत्वाकांक्षाओं को मजबूती देगा, बल्कि SpaceX-xAI के राजस्व और भविष्य की विकास योजनाओं को भी बड़ा समर्थन प्रदान करेगा।

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसी। AI कंपनी एंथ्रोपिक ने उन्नत AI विकास पर रोक लगाने की अपील की।

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसी। AI कंपनी एंथ्रोपिक ने उन्नत AI विकास पर रोक लगाने की अपील की।

मानव नियंत्रण और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियॉं।

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसी। AI सुरक्षा पर केंद्रित कंपनी Anthropic ने दुनिया भर में उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास की गति धीमी करने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में AI सिस्टम इतने सक्षम हो सकते हैं कि वे स्वयं को बेहतर बनाने लगें, जिससे मानव नियंत्रण और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

कंपनी के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि "रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट" (Recursive Self-Improvement) जैसी स्थिति आने पर AI तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ सकती है। इसे देखते हुए एंथ्रोपिक ने देशों और AI कंपनियों के बीच वैश्विक सहमति तथा निगरानी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्नत AI विकास को अस्थायी रूप से धीमा या रोका जा सके।

एंथ्रोपिक का मानना है कि AI मानव समाज के लिए बड़े अवसर लेकर आ सकता है, लेकिन इसके संभावित जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कंपनी ने कहा कि सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना अत्यधिक शक्तिशाली AI सिस्टम भविष्य में अप्रत्याशित परिणाम पैदा कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी की इस अपील पर कुछ विशेषज्ञों और उद्योग जगत के लोगों ने सवाल भी उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि AI विकास की गति कम करने से नवाचार और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि तकनीक के सुरक्षित उपयोग के लिए पहले से तैयारी करना आवश्यक है।

नई दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान,8 जून अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, दोनों पक्षों ने किए नए हमले।

नई। दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान,8 जून अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, दोनों पक्षों ने किए नए हमले।

दोनों पक्षों में तनाव जारी है वार्ता की कोशिशों के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष तेज,अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित।

नई। दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान, 8 जून सीज फायर और वार्ता की कोशिशों के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष तेज,अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 

हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे से जुड़े सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। 

रिपोर्टों के अनुसारअमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ तटीय सैन्य रडार ठिकानों पर कार्रवाई की, 

जबकि जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की कोशिश की।

सूत्रों के अनुसार ईरानी मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों के बाद अमेरिकी बलों ने जवाबी कार्रवाई की। 

वहीं ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले हुए युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। 

दोनों देशों के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बावजूद हालात में सुधार नहीं दिख रहा है।

क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला है। 

तेल की कीमतों में उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरे मध्य-पूर्व में व्यापक अस्थिरता पैदा हो सकती है। 

संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने तथा कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है।

नई दिल्ली। ई 85 इथेनॉल फ्यूल लॉन्च, हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम।

नई दिल्ली। ई 85 इथेनॉल फ्यूल लॉन्च, हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम।

इथेनॉल फ्यूल टैंक एवं बनाने का प्लांट।

केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी

नई दिल्ली, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने देश में E85 इथेनॉल फ्यूल का शुभारंभ किया। 
सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जाने के साथ-साथ पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
E85 ईंधन में लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। यह विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए तैयार किया गया है। 
सरकार के अनुसार, E85 पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगा।
गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार लंबे समय से इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। ई-85 फ्यूल के विस्तार से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पेट्रोलियम आयात पर होने वाले खर्च में भी कमी आ सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से विभिन्न क्षेत्रों में ई-85 फ्यूल की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और आवश्यक ईंधन अवसंरचना के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ई-85 फ्यूल का लॉन्च हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।


झाझा (जमुई)। झाझा रेलवे स्टेशन पर पानी की सप्लाई बंद होने से यात्रियों में नाराजगी।

झाझा (जमुई)। झाझा रेलवे स्टेशन पर पानी की सप्लाई बंद होने से यात्रियों में नाराजगी।
यात्रियों को समय का आभाव रहने के कारण स्टेशन मास्टर को लिखित शिकायत दर्ज नहीं होता है।

यात्रियों को समय का आभाव रहने के कारण स्टेशन मास्टर को लिखित शिकायत दर्ज नहीं होता है।

झाझा (जमुई), संवाददाता।

झाझा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर ट्रेनों के आगमन से पहले पेयजल की सप्लाई बंद किए जाने का आरोप यात्रियों ने लगाया है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन आने के समय जब प्लेटफार्म पर सबसे अधिक भीड़ होती है, उसी दौरान पानी उपलब्ध नहीं रहने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

यात्रियों के अनुसार, प्लेटफार्म पर लगे नलों में पानी नहीं आने के कारण उन्हें मजबूरन स्टॉलों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों को असुविधा भी झेलनी पड़ रही है। खासकर गर्मी के मौसम में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय यात्रियों ने आरोप लगाया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसके समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि रेलवे प्रशासन को यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए और प्लेटफार्म पर नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराना चाहिए।

यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों से मांग की है कि झाझा रेलवे स्टेशन पर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की जांच कराई जाए तथा ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय भी पानी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में रेलवे प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।